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ममता बनर्जी की लाइब्रेरियों से हटेंगी पूर्व CM की 150 किताबें, ‘एपांग ओपांग झपांग’ पर भी बैन

ममता बनर्जी की लाइब्रेरियों से हटेंगी पूर्व CM की 150 किताबें, 'एपांग ओपांग झपांग' पर भी बैन

ममता बनर्जी की लाइब्रेरियों से हटेंगी पूर्व CM की 150 किताबें, ‘एपांग ओपांग झपांग’ पर भी बैन

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) बिखरने की कगार पर है, वहीं अब राज्य की नई सरकार ने ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका दिया है। बंगाल की नई सरकार ने राज्य की सभी पब्लिक लाइब्रेरियों (सार्वजनिक पुस्तकालयों) से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लिखी गई सभी किताबों को हटाने का आधिकारिक फैसला कर लिया है। ममता बनर्जी की लाइब्रेरियों से हटेंगी पूर्व CM की 150 किताबें, ‘एपांग ओपांग झपांग’ पर भी बैन

हटाए जाने वाली इन किताबों में ममता बनर्जी की सबसे ज्यादा चर्चित और विवादित कविता ‘एपांग ओपांग झपांग’ भी शामिल है। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य के सियासी और साहित्यिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

“चरित्र-निर्माण की अहमियत नहीं, तो लाइब्रेरी में जगह नहीं”

इस बड़े नीतिगत फैसले को लेकर शिक्षा विभाग और लाइब्रेरी से जुड़े आला अधिकारियों का रुख बेहद कड़ा है:

  • अफसरों का तर्क: अधिकारियों का साफ कहना है कि जिन किताबों में शिक्षा, ज्ञान या चरित्र-निर्माण की कोई अहमियत नहीं है, उन्हें अब सरकारी लाइब्रेरी में कोई स्थान नहीं दिया जाएगा।

  • टैगोर और विवेकानंद को प्राथमिकता: सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब पुस्तकालयों में केवल रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और बंकिमचंद्र चटर्जी जैसी देश की महान विभूतियों की साहित्यिक रचनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

  • जून 2025 का तुगलकी फरमान रद्द: नई सरकार का यह फैसला सीधे तौर पर जून 2025 में पिछली टीएमसी सरकार द्वारा जारी किए गए उस विवादित आदेश को पूरी तरह खत्म करता है, जिसके तहत राज्य के सभी स्कूलों और लाइब्रेरियों के लिए ममता बनर्जी की लिखी लगभग 90 किताबें खरीदना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया था।

लाइब्रेरी मंत्री बोले- “पिछली सरकार तानाशाह की तरह चली, अब कचरा साफ होगा”

इस पूरे मामले पर पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त लाइब्रेरी मंत्री गौरी शंकर घोष ने बेहद तीखा और विस्फोटक बयान दिया है:

“पिछली सरकार पूरी तरह से तानाशाह के तरीके से चलाई जा रही थी। केवल तुष्टिकरण और आत्म-प्रशंसा के लिए ममता बनर्जी की लिखी बेसिर-पैर की किताबों को जबरन सरकारी खर्च पर लाइब्रेरियों में ठूंस दिया गया था। अब राज्य में लोकतांत्रिक नई सरकार आ चुकी है, इसलिए ऐसी सभी गैर-जरूरी और बिना साहित्यिक मूल्य वाली किताबों को तुरंत हटा दिया जाएगा।”

 क्या है ‘एपांग ओपांग झपांग’ और ममता का साहित्यिक सफर?

ममता बनर्जी राजनीति के साथ-साथ लेखन का भी शौक रखती हैं और वे अब तक 150 से ज्यादा किताबें लिख चुकी हैं: ममता बनर्जी की लाइब्रेरियों से हटेंगी पूर्व CM की 150 किताबें, ‘एपांग ओपांग झपांग’ पर भी बैन

  • ‘कविताओं का बगीचा’: ‘एपांग ओपांग झपांग’ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लिखी गई एक बेहद चर्चित और सोशल मीडिया पर ट्रोल होने वाली कविता है। यह कविता उनके प्रसिद्ध कविता संग्रह ‘कविता बिटान’ (जिसका अर्थ होता है ‘कविताओं का बगीचा’) में प्रकाशित हुई थी।

  • 1995 से शुरू हुआ सफर: ममता बनर्जी ने अपनी पहली किताब साल 1995 में ‘उपलब्धि’ नाम से लिखी थी। इसके बाद उन्होंने Trinamul Stare Trinamuler Joy, गुलदस्ता-ए-शायरी, Sishumon, दुआरे सरकार, आमार जंगल, आमार पहाड़, अजब छड़ा, Singur Joyee, Banglar Kanyashree और सहिसुष्णता जैसी कई पुस्तकें लिखीं, जिनका अंग्रेजी और उर्दू समेत कई भाषाओं में अनुवाद भी हो चुका है।

15 साल बाद सत्ता से बाहर होते ही चौतरफा संकट

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि करीब 15 साल बाद बंगाल की सत्ता से बेदखल होने के बाद ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का यह सबसे कठिन दौर है। एक तरफ जहां उनके अधिकतर सांसद, विधायक और पार्षद बागी होकर पार्टी छोड़ रहे हैं और टीएमसी के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुद उन पर एफआईआर और अब लाइब्रेरियों से उनका नामोनिशान मिटाया जाना उनके रसूख पर बहुत बड़ी चोट है।

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