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15 साल की उम्र में ABVP का हिस्सा बनें JP Nadda, जबलपुर कटनी से है ये खास रिश्ता

jp nadda 17 06 2019 m

वेब डेस्क। जिंदगी के उस दौर में उन्होंने राजनीति का ककहरा सीख लिया था, जब नवयुवा अपनी हसीन जिंदगी के सपने देखता है। किशोरावस्था का यह दौर मौज-मस्ती और अल्हड़पन की होता है, लेकिन इस युवा के मन में तो राजनीति के जरिए देश की सेवा करने की हसरतें जवां हो रही थी। वो समाज के हर तबके की आवाज को, अवाम के उम्मीदों की हकीकत को देश-दुनिया के सामने लाना चाहता था और आखिर उस युवा को यह मौका मिल गया बिहार के छात्र आंदोलन से। हम बात कर रहे हैं सोमवार को भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए जेपी नड्डा की। आइये जानते हैं उनके जीवन और राजनीतिक पारी की कुछ बातें।

जेपी आंदोलन से रखा था राजनीति में कदम

जेपी नड्डा का पूरा नाम जयप्रकाश नड्डा है। उनका जन्म 1960 में पटना में हुआ था। जेपी नड्डा महज 15-16 साल की उम्र में बिहार के छात्र आंदोलन से जुड़ गए थे। इसके बाद वह राजनीति में सक्रिय रूप से शिरकत करते हुए भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी का हिस्सा बन गए। 1977 में छात्र संघ चुनाव में वह पटना यूनिवर्सिटी के सेक्रेटरी चुने गए और 13 सालों तक वह विद्यार्थी परिषद में सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे।

जबलपुर कटनी के हैं दामाद

जे पी नड्डा का जबलपुर से खास नाता है, दरअसल वह जबलपुर के दामाद भी हैं। पूर्व सांसद, पूर्व विधायक जयश्री बेनर्जी की पुत्री मल्लिका से उनका विवाह हुआ। जय श्री बेनर्जी के पति सुभाष बेनर्जी भी संघ के सक्रिय प्रचारक रहे। उनके छोटे भाई कटनी निवासी पूर्व मंत्री विभाषचंद्र बेनर्जी भी जनसंघ के समय मे कटनी से विधायक फिर मंत्री बने। ये दोनों ही परिवार भाजपा की सक्रिय राजनीति में अभी भी शामिल हैं। इस लिहाज से श्री नड्डा कटनी तथा जबलपुर के दामाद भी हैं।

हिमाचल में दी राजनीति को नई दिशा

छात्र राजनीति में जेपी नड्डा की काबिलियत को देखते हुए उनको पैतृक राज्य हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थी परिषद का प्रचारक बना कर भेज दिया गया। यहां पर उनका अध्ययन भी जारी रहा। थोड़े ही समय में जेपी नड्डा ने प्रदेश के युवाओं में काफी लोकप्रियता हासिल कर ली। नड्डा के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार छात्र संघ चुनाव हुआ और उसमें विद्यार्थी परिषद को शानदार जीत हासिल हुई। उस वक्त वह ( 1983-1984 ) हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी परिषद के पहले प्रेजिडेंट बने। 1986 से 1989 तक वह विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव रहे।

31 साल की उम्र में बने भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष

1989 में जेपी नड्डा को भाजपा ने केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रीय संघर्ष मोर्चा की जिम्मेदारी सौपी। आंदोलन को चलाने के लिए उन्हें 45 दिन तक जेल में भी रहना पड़ा। 1989 में नड्डा के कंधों पर अहम जिम्मेदारी आई और उनको लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया गया जो देश में युवा कार्यकर्ताओं को चुन कर चुनाव लड़ने के लिए आगे लाने का काम करती था। 1991 में 31 साल की उम्र में जेपी नड्डा भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्य्क्ष बने।

तीन बार विधायक, एक बार सांसद बने

जेपी नड्डा वे पहली बार 1993 में हिमाचल प्रदेश से विधायक चुने गये। 1994 से 1998 तक विधानसभा में पार्टी के नेता भी रहे। 1998 में वो दोबारा विधायक चुने गए। इस बार उनको स्वास्थ्य और संसदीय मामलों का मंत्री बनाया गया। 2007 में फिर से विधायक चुने गए और प्रेम कुमार धूमल की सरकार में उन्हें वन-पर्यावरण, विज्ञान व टेक्नालॉजी विभाग का मंत्री बनाया गया। 2012 में जेपी नड्डा को राज्यसभा का सांसद चुना गया और मोदी सरकार में उनको स्वास्थ्य मंत्रालय की कमान सौंपी गई।

 

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