12 हजार हॉर्स पॉवर की क्षमता वाला रेल इंजन पहुंचा जबलपुर, खूबियां सुनकर आप भी करेंगे वाह
जबलपुर। भारतीय रेलवे का सर्वाधिक आधुनिकतम व अति बलशाली लोकोमोटिव इंजिन 12 हजार हार्स पावर की क्षमता वाला आज शुक्रवार 19 जून को जबलपुर पहुंचा।
जबलपुर पहुंचने पर पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक शैलेंद्र कुमार सिंह अन्य आला अधिकारियों के साथ इस इंजिन को देखने पहुंचे व इसकी खूबियों से रूबरू हुए।
पश्चिम मध्य रेल में आया 12000 हार्स पावर का नया लोकोमोटिव इंजन पमरे जबलपुर मंडल में मालगाडिय़ों के सुगम संचालन हेतु बेहतर होगा।
लोको इंजन के संचालन हेतु मुख्य लोको निरीक्षक महेश मीना द्वारा लोको पायलट/सहायक लोको पायलट एवं मुख्य लोको निरीक्षकों को ऑनहैण्ड प्रशिक्षण दिया गया।
महाप्रबंधक शैलेन्द्र कुमार सिंह, अपर महाप्रबंधक शोभन चैधुरी, प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर डॉ. आर. के. गुप्ता, मुख्य विद्युत लोको इंजी. सुरेन्द्र यादव, मंडल रेल प्रबंधक संजय विश्वास, वरि. मंडल विद्युत इंजी. /क.परि. रामबदन मिश्रा, वरि. मंडल यांत्रिक इंजी. एन.के. मिश्रा द्वारा आज लोको इंजन का निरीक्षण किया गया।
यह लोकोमोटिव भारतीय रेल के लिये नया है जो कि मधेपुरा में बनाया गया है. वर्तमान समय में इस प्रकार के लोको इंजन की मरम्मत का कार्य सहारनपुर में किया जा रहा है।
ये है खूबी
यह लोको इंजन 12000 हार्स पावर का है, जिसका वजन 180 टन है, इस लोको इंजन की सीरीज 60020 से प्रारंभ होती है।
लोको की बोगी बो-बो प्रकार की है. लोको इंजन की लंबाई 35 मीटर है. लोको इंजन की अधिकतम गति 100 KMPH है जिसे 120 KMPH तक बढ़ाया जा सकता है।
इसका गेयर रेश्यो 110/23 है. यह लोको इंजन (ALSTOM) ऐलेस्टम कंपनी द्वारा बनाया गया है जिसमें हाई कम्प्रेशर केपेसिटी 1000 ली. के 2 एम.आर. टैंक लगाये गये हैं जो कि लांग हाल लोड को सुगमता से चलाने में सक्षम है।
1/150 के अप गे्रडियंट पर फुल लोड लगभग 5400 टन बिना बैंकर के 60 किमी प्रतिघंटा की गति से चलाया जा सकता है। लोको कैब पूर्णत: ए.सी. है। लोको में सभी एम.सी.बी./न्यूमेटिक कॉक एक ही स्थान पर लगाये गये हैं, जिससे लोको पायलट को ट्रबल शूटिंग में सुविधा होगी।