सागर। आज मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने दसवीं बोर्ड के नतीजों का ऐलान किया है। इस बार दसवीं में 61 फीसदी बच्चे पास हुए हैं। मेरिट लिस्ट में इस बार छोटे शहरों का दबदबा है। खासतौर पर सागर जिले के बच्चों ने अपनी काबिलियत साबित की। मेरिट लिस्ट में पहले पांच स्थानों पर सागर के ही छात्र हैं। पहले स्थान पर सागर के ही दो छात्र हैं। एक गगन दीक्षित तो दूसरा आयुष्मान ताम्रकार। दोनों ने ही इस परीक्षा में 500 में से 499 अंक हासिल किए हैं। गगन के पिता किसान हैं तो आयुष्मान के पिता चौकीदार हैं। ऐसे में दोनों ने कड़े संघर्ष के बाद इस मकाम को हासिल किया है। खासतौर पर आयुष्मान की कामयाबी, उनका संघर्ष, पढ़ाई के प्रति जुनून तो सबके लिए प्रेरणा है। दसवीं की मेरिट लिस्ट में सुसनेर के राजकुमार सोनी ने तीसरा स्थान हासिल किया है। उसके पिता चाय की दुकान चलाते हैं।
पिता के बदले चौकीदारी भी करता था आयुष्मान
दसवीं में टॉप करने वाले आय़ुष्मान ताम्रकार के लिए ये कामयाबी किसी सपने से कम नहीं है। घर की माली हालत ठीक नहीं होने की वजह से आय़ुष्मान कई बार पिता के बदले चौकीदारी करने जाता था। मां का भी काम में हाथ बंटाता था। जहां दूसरे बच्चे लगातार पढ़ाई करते थे। वहीं आयुष्मान को पढ़ाई के लिए वक्त निकालना पड़ता था। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार पिता की गैरमौजूदगी में उसे चौकीदारी करने जाना पड़ता था। इतना ही नहीं जहां दूसरे बच्चे गर्मी की छुट्टियों में घूमने जाते थे। वहीं आयुष्मान इस दौरान किराने की दुकान में काम करके अपनी फीस का इंतजाम करता था। आयुष्मान की दो बहन और एक भाई है। दोनों बहनें डिग्री कॉलेज में पढ़ रही हैं।
बेटा इंजीनियर बने यही इच्छा
मां भी आयुष्मान की कामयाबी पर खुश हैं। लेकिन इसके पीछे के संघर्ष को याद करना नहीं भूलतीं। मां ने बताया कि, पति वॉचमैन हैं। ऐसे में जरुरत पड़ने पर आयुष्मान उनके साथ चौकीदार करने जाता था। दिन में पढ़ने का वक्त नहीं मिलता तो रात में जागकर बहन के साथ पढ़ाई करता। अब यही उम्मीद है कि वो इंजीनियर बन जाए। माली हालत अच्छी नहीं होने की वजह से कई बार पिता ने पढ़ाने से इंकार कर दिया था। लेकिन स्कॉलरशिप के जरिए फीस का इंतजाम होने की वजह से पढ़ाई जारी रही।
सागर की ममता और दीपेंद्र भी बने टॉपर
दसवीं की मेरिट लिस्ट में दूसरे स्थान पर भी सागर के दीपेंद्र अहरिवार रहे हैं। वो भी गगन दीक्षित की तरह सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के छात्र हैं। दीपेंद्र ने परीक्षा में पांच सौ में से कुल 497 अंक मिले हैं। दसवीं की मेरिट लिस्ट में जगह बनाने वाले दीपेंद्र अपनी इस कामयाबी का श्रेय माता-पिता और स्कूल के टीचर्स को देते हैं। दीपेंद्र के मुताबिक मैं रोज 6-7 घंटे पढ़ाई करता था। किसी विषय में अटकने पर टीचर्स से मदद लेता था।
वहीं सागर की ममता ने भी मेरिट लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। उसने 99.2 फीसदी अंक हासिल किए हैं। ममता ने अपना सक्सेसा मंत्र साझा करते हुए बताया कि, “आखिरी एक महीने में मैंने हर विषय के लिए 6 दिन बांट लिए थे। इस दौरान मैं रोज 10-12 घंटे पढ़ती थी। इस दौरान बहनों और स्कूल के टीचर्स का काफी सहयोग मिला। मेरा लक्ष्य अब आईएएस बनना है।”
