भोपाल : किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ का आज से दस दिवसीय देशव्यापी गांव बंद आंदोलन शुरू है। यह आंदोलन 10 जून तक चलेगा। बीते साल मंदसौर में हुए किसान आंदोलन को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। मंदसौर, रतलाम, नीमच समेत तमाम उपद्रव संभावित क्षेत्रों में पुलिस बल को तैनात रहने के विशेष निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले खरगोन पहुंचे राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष त्रिलोक गोटे ने कहा कि आंदोलन का मकसद आमजन के लिए समस्या खड़ी करना नहीं है। बल्कि, किसानों की अनदेखी कर रही सरकार का ध्यान आकर्षित कराना है।
राष्ट्रीय किसान महासंघ पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबा जा रहा है और आत्महत्या करने को मजबूर है। वहीं, किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा है। महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष त्रिलोक गोटे ने किसान संघ को सरकार का एजेन्ट बताया। बता दें कि आंदोलन के दौरान गांव से कोई भी सामग्री शहर नहीं जाएगी। आंदोलन में शामिल संगठनों ने यह पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि दूध-फल-सब्जी जैसी खाद्य सामग्री के लिए शहरवासियों को गांवों में बनाए गए विक्रय केन्द्र आना होगा।
वहीं, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष शिव कुमार ने बताया कि महासंघ 5 जून को विश्वासघात दिवस, छह जून को बीते वर्ष गोलीकांड में शहीद किसानों को श्रद्धांजली दी जाएगी, आठ जून को दो किसानों को पीटकर मार डाला था, इस पर धिक्कार दिवस मनाया जाएगा और 10 जून को भारत बंद किया जाएगा। बता दें कि किसान स्वामीनाथन कमीशन को लागू करने और कर्ज माफ करने समेत कई अन्य मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं।
किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर मंदसौर, नीमच और रतलाम में देखने को मिलेगा। आंदोलन की चेतावनी के बाद एक से 10 जून तक दूध, फल-सब्जी की आपूर्ति सशस्त्र बलों के पहरे में होगी। शहरों में दूध, फल-सब्जी लाने वाले किसानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उनके साथ सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती रहेगी। सांची दुग्ध संघ को भी प्रशासन ने अपने टैंकरों के साथ पूरे समय निजी सुरक्षा गार्ड तैनात रखने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, दूसरी तरफ सरकार आंदोलन से निपटने के अलावा दूध और सब्जी की किल्लत को भी दूर करने के प्रयास कर रही है। सरकार ने दूध की सप्लाई (आपूर्ति) पर लागू एस्मा को तीन माह और बढ़ा दिया गया है। प्रदेश में सात हजार दुग्ध उत्पादक समितियां हैं। इनमें पांच हजार समितियां ऐसी हैं, जहां से बड़ी मात्रा में दूध आता है। सरकार ने दो दिन पहले ही चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कोई दूध की सप्लाई रोकते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ये कार्रवाई अत्यावश्यक सेवा कानून (एस्मा) के तहत की जाएगी। इसमें गिरफ्तार करके सीधे जेल भी भेजा जा सकता है।

