नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि देशभर में एक अप्रैल 2020 से भारत स्टेज-4 यानी बीएस-4 श्रेणी के वाहन नहीं बेचे जाएंगे। न ही इस मानक के वाहन पंजीकृत हो सकेंगे। इसके साथ ही बीएस-6 उत्सर्जन नियम एक अप्रैल 2020 से देशभर में प्रभावी हो जाएंगे।
बताते चलें कि बीएस उत्सर्जन मानक है, जो सरकार ने मोटर वाहनों से पर्यावरण में होने वाले प्रदूषक तत्वों के नियमन के लिए बनाए हैं। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि उक्त तारीख से पूरे देश में बीएस-6 के अनुकूल वाहनों की ही बिक्री की जा सकेगी।
पीठ ने कहा कि और अधिक स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ना वक्त की जरूरत है। जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 27 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था। बीएस-4 नियम अप्रैल 2017 से देशभर में लागू हैं। वर्ष 2016 में केंद्र ने घोषणा की थी कि देश में बीएस-5 नियमों को अपनाए बगैर ही 2020 तक बीएस-6 नियमों को लागू कर दिया जाएगा।
बताते चलें कि भारत में बीएस-2 मानक वाले वाहनों से इसकी शुरुआत हुई थी। सुनवाई के दौरान वकील अपराजिता सिंह ने सरकार के कदम का विरोध किया था। सरकार आटोमोबाइल निर्माताओं को 31 मार्च 2020 तक निर्मित अपने गैर बीएस-6 मानक चार पहिया वाहनों को 30 जून 2020 तक बेचने का समय देना चाहती है।
अपराजिता वायु प्रदूषण के मामले पर एमिकस क्यूरी के रूप में कोर्ट की मदद कर रही हैं। इसके अलावा उन्होंने गैर बीएस-6 मानक भारी वाहनों की बिक्री के लिए 30 सितंबर 2020 तक का समय विस्तार देने के प्रस्ताव का भी विरोध किया था।

