Site icon Yashbharat.com

क़ुबूल हुआ रोजा : इसे तोड़कर दिया खून, बचाई दोस्त की मां की जान

fakhruddin sardarpur 02 06 2019 m

सरदारपुर। रमजान के पवित्र माह में रोजे का बड़ा महत्व होता है। बावजूद इसके राजगढ़ के एक मुस्लिम युवक ने अपने दोस्त की मां की जान बचाने के लिए रोजा तोड़कर खून दिया। साथ ही युवक ने दोस्ती की मिसाल पेश कर यह भी साबित किया कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। मजहब के नाम पर बांटने वालों को इंसानियत का संदेश भी दिया।

राजगढ़ निवासी अनिल पांडे की माताजी रामवती पांडे (70) टीबी की बीमारी से पीड़ित हैं। दो बार पहले भी उन्हें खून चढ़ाया जा चुका है। रविवार को एक बार फिर उन्हें खून की जरूरत पड़ी। अनिल पांडे के दोस्त राजगढ़ के ही फखरुद्दीन खान (35) अस्पताल में मौजूद थे।

जब खून की जरूरत के बारे में पता चला तो वे सहर्ष अपना खून देने को राजी हो गए। डॉक्टर एमएल जैन ने उन्हें खून देने से पहले कुछ खाने को कहा। फखरुद्दीन का रोजा था और कुछ भी खाने से उनका रोजा टूट जाता। बावजूद फखरुद्दीन ने रोजा तोड़कर दोस्त की मां को खून उपलब्ध करवाया।

किसी की जान बच सकती है तो मानव धर्म निभाऊंगा

फखरुद्दीन ने बताया कि रमजान माह में जरूरतमंदों की मदद करने का बड़ा महत्व रहता है। ऐसे में यदि मेरा रोजा तोड़ने से किसी की जान बच सकती है तो मैं पहले मानव धर्म निभाऊंगा और यहां तो फिर दोस्ती का हक अदा करने की भी बात थी। यह मेरा सौभाग्य है कि रमजान माह में मुझे मदद करने का मौका मिला।

सरदारपुर ब्लड बैंक के संचालक अंबर गर्ग ने बताया कि राजगढ़ की बुजुर्ग महिला को ब्लड की आवश्यकता थी। फखरुद्दीन खान ने आगे आकर रक्तदान महादान का पुनीत कार्य किया। हमारे द्वारा संचालित ब्लड बैंक के सदस्य एवं अन्य लोगों के माध्यम से वर्तमान समय तक करीब 1850 लोगों को ब्लड उपलब्ध करा चुके हैं।

Exit mobile version