हाथरस पीड़ित परिवार की जबलपुर वाली भाभी जी को मिले नोटिस, दे रहीं मानवता की दुहाई

जबलपुर, भोपाल। बहुचर्चित हाथरस मामले में पीड़ित परिवार के घर पर दो दिन रहीं डॉ. राजकुमारी बंसल ने कहा है कि उन पर लगे तमाम आरोप निराधार हैं। वे मानवता के नाते हाथरस गईं। इस दौरान उन्होंने अनेक संगठनों, कुछ नेताओं और मीडिया से बात अवश्य की है। बहरहाल, मेडिकल कॉलेज में डॉ. बंसल के साथ काम करने वाले डॉक्टर्स इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

 

डॉ. बंसल ने बताया कि वे महज मानवता के नाते हाथरस गईं। जब बच्ची के साथ ऐसी घटना सुनी, तो व्यथित हो गईं। वहां जाकर दो दिन पीड़ित के स्वजन के घर में सदस्य की तरह रही। छह अक्टूबर की दोपहर वहां से लौटते वक्त घर के वरिष्ठ सदस्यों ने रोका भी, लेकिन पीड़ित की भाभी ने कहा कि आपको कोई परेशानी न हो इसलिए यहां से चली जाएं। बताया जा रहा हैं कि उन्हें पहले भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा नोटिस मिल चुके हैं।

हाथरस में अनेक लोगों से मिलीं

डॉ. राजकुमारी चार अक्टूबर को हाथरस पहुंचीं और दो दिन पीड़िता के घर में ही रुकीं। इस दौरान मीडिया, वरिष्ठ अधिवक्ता, दिल्ली से आई वूमन आर्गेनाइजेशन की सदस्य, सपा नेता, आप के नेताओं से उनकी मुलाकात हुई। मीडिया कर्मियों के सवाल पर भी डॉ. राजकुमारी का जवाब था कि महज पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए यहां आईं हैं।

ग्वालियर निवासी डॉक्टर राजकुमारी बंसल ने स्कूल शिक्षा के बाद 2002 में मेडिकल कॉलेज जबलपुर में एमबीबीएस के लिए प्रवेश लिया। इसके बाद इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से डीओएमएस में पीजी किया। 2011 में उनके पति डॉ. इंदरदेव मेडिकल अस्पताल जबलपुर में पदस्थ हुए। इसके बाद उन्होंने के जबलपुर के आसपास सरकारी अस्पतालों में नौकरी की। 2018 में पीजी करने के बाद मेडिकल कॉलेज में फॉरेंसिक मेडिसन डिपॉटर्मेंट में पदस्थ हुईं।

 

साथी डॉक्टर्स कुछ भी बताने से बच रहे

डॉ. राजकुमारी के साथी डॉक्टर्स से जब इस मामले में बात करने का प्रयास किया तो वे कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि यह बात अवश्य सामने आई है कि डॉक्टर राजकुमारी समाजसेवा के जुड़े अनेक कार्य करती रहती हैं। इसे लेकर सायबर सेल ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है। उप्र पुलिस ने अभी तक इस मामले में जबलपुर पुलिस से अभी तक संपर्क नहीं किया है।

 

डॉ. राजकुमारी बंसल तीन तारीख से ड्यूटी से अनुपस्थित थीं। उन्होंने एक दिन के लिए मुख्यालय छोड़ने की सूचना विभागाध्यक्ष को टेलीफोन पर दी थी। आठ तारीख को वे ड्यूटी पर उपस्थित हुईं। विधिवत अनुमति लिए बगैर मुख्यालय से गायब रहने के मामले में उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। – डॉ. प्रदीप कसार, डीन, नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल जबलपुर

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