
अहमदाबाद. गुजरात हाईकोर्ट ने कोरोनावायरस संकट के बीच जारी सियासी बयानबाजी पर तल्ख टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि कोरोनावायरस इंसानी संकट है, ना कि सियासी। केवल सरकार की आलोचना करने से जादुई तरीके से लोगों का मर्ज ठीक नहीं हो जाएगा और ना ही मरे हुए लोग जिंदा हो जाएंगे।
जरूरी निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए- कोर्ट
कोरोनावायरस महामारी के संबंध में दायर एक पीआईएल पर रविवार को हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिए कि हर श्रेणी के मरीज के लिए जो भी जरूरी स्वास्थ्य निर्देश दिए गए हैं, उनका सख्ती से पालन किया जाए। लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की वजह से एक भी जान नहीं जानी चाहिए।
जान गंवाने वाले पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे- एक्सपर्ट
हाईकोर्ट को गुजरात सरकार ने बताया कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में कोरोनावायरस के चलते जान गंवाने वाले 83 फीसदी से ज्यादा मरीज पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। अहमदाबाद के अस्पतालों में अब तक 789 कोरोना मरीजों की जान गई है। इसमें से अकेले 415 मौतें सिविल अस्पताल में हुई हैं।
गुजरात सरकार ने इन सभी मौतों का विशेषज्ञों से विश्लेषण करवाया। इसके बाद पता चला कि सिविल अस्पताल में जान गंवाने वाले 351 मरीज शुगर, हाईपरटेंशन, फेफड़ों की बीमारी, थायरॉयड, किडनी जैसी बीमारियों से जूझ रहे थे।








