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हर साल फीस नहीं बढ़ा सकेंगे निजी विवि, बताना होगा तीन का साल पैकेज

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भोपाल। मध्यप्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों के तहत संचालित होने वाले इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज हर साल फीस नहीं बढ़ा सकेंगे, उन्हें तीन साल का पूरा पैकेज छात्र को एडमिशन के समय ही बताना होगा और उसके मुताबिक ही फीस ली जाएगी।

दरअसल निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग फीस को लेकर आ रहीं लगातार रही शिकायतों के चलते ये व्यवस्था लागू करने की योजना बना रहा है। यह व्यवस्था प्रदेश के 32 निजी विवि में लागू होगी।

विवि को एडमिशन के समय प्रत्येक विद्यार्थी के अभिभावक को यह बताना होगा की आगामी तीन साल में छात्र या छात्रा से कितनी फीस ली जाएगी ।

निजी विवि नियामक आयोग के अध्यक्ष अखिलेश पांडे इस संबंध में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन को पत्र भी लिख चुके हैं। उन्होंने बताया कि अभी मेडिकल की फीस मप्र में सबसे महंगी है और कॉलेज प्रबंधन भी कहीं ना कहीं फीस को लेकर मनमानी करते हैं।

जिसके चलते अगर अभिभावक को पहले से ही पता होगा कि तीन साल में कितनी फीस लगनी हैं तो वे मानसिक रूप से तैयार होंंगे। इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक भार आने की परेशानी भी नहीं होगी और आसानी से वह अपने बच्चे को मेडिकल की पढ़ाई करवा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि निजी विश्वविद्यालयों के मालिकों से भी इस संबंध में बातचीत की जाएगी ताकि वे किसी भी कोर्स के यूजी के लिए तीन साल और पीजी के लिए दो साल के पैकेज तैयार करें। हालांकि यह फीस एक मुश्त नहीं ली जाएगी। उन्होंने बताया कि मेडिकल एजुकेशन में कॉलेजों की फीस में काफी अंतर है और कॉलेज हर साल सुविधाओं के नाम पर फीस बढ़ाने की मांग करते हैं, इस व्यवस्था के लागू होने के बाद इस तरह की सभी शिकायतों का स्वत: ही निराकरण हो जाएगा।

इनका कहना है

अब प्राइवेट यूनिवसिर्टी में इस तरह की व्यवस्था लागू करने जा रहे हैं। इससे अभिभावक भी मानसिक रूप से फीस देने में तैयार रहेगा वहीं बाद में अतिरिक्त खर्चे के नाम पर उससे ज्यादा फीस नहीं मांगी जा सकेगी – अखिलेश पांडे, अध्यक्ष, मप्र निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग

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