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स्व सहायता समूहों को दिया गया बकरी पालन प्रशिक्षण

कटनी। भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान कटनी में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले विकासखंड ढीमरखेड़ा के ग्राम दियागढ़ झीना पिपरिया के स्व सहायता समूहों के सदस्यों को आत्मनिर्भर स्वावलंबी एवं स्वरोजगार स्थापित करने के लिए प्रबंधक पवन कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन मैं प्रशिक्षक रामसुख दुबे द्वारा बकरी पालन का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में बकरी पालन से लाभ बकरियों की विभिन्न नस्लों बकरियों से दूध मांस एवं ऊन प्राप्त होने की जानकारी दी गई।

दूध देने वाली जमुनापारी सिरोही बरबरी एवं बीटल मांस के लिए ब्लैक बंगाल मेहसाना उस्मानाबादी तथा ऊन उत्पादन के लिए कश्मीरी चांगथांग आदि नस्लों की विस्तृत तकनीकी जानकारी दी गई। बकरी के दूध में गंध आती है यह गंध बकरे के सिर में पाई जाने वाली ग्रंथि से निकलने वाले कैजिक अम्ल के कारण आती है जो की बकरी के दूध द्वारा शीघ्र सोख लिया जाता है गंध से बचाव के लिए बकरे को बकरियों से 16 मीटर दूर बांधने की जानकारी दी गई।

बकरियों में होने वाले जीवाणु जनित रोग न्यू मोनिया जहरीले दस्त खुरों का रोग संक्रामक गर्भपात तिल्ली ज्वर गलघोंटू आंतों की टीवी एवं थनैला रोग तथा विषाणु जनित रोग के अंतर्गत खुर पका मुंह पका बकरी में प्लेग एवं चेचक तथा बाह्य एवं आंतरिक परजीवी रोगों की पहचान तथा उपचार एवं रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।

पशु चिकित्सक डॉक्टर आरके सोनी ने आवास के लिए बकरी का बाड़ा तथा संतुलित पोषण आहार एवं चारा के अंतर्गत पेड़ों की पत्तियां झाड़ियां घास तथा विभिन्न चारा के विषय में बतलाया गया। प्रशिक्षण समन्वयक सुनील रजक एवं अनुपम पांडे तथा कर्मचारी राजेश विश्वकर्मा एवं ओमप्रकाश तिवारी द्वारा प्रशिक्षण में सहयोग किया गया।

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Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम