Site icon Yashbharat.com

सिंधिया को महत्व राजस्थान पर निशाना, ये है BJP की रणनीति

images 60 1

भोपाल । मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से ही भाजपा में असंतोष बढ़ता हुआ दिख रहा है। सरकार में विभागों का बंटवारा हर दिन टलते जा रहा है, हालांकि शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर में कहा कि रविवार को मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा कर देंगे। इससे यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि संभवत: विभागों के बंटवारे को लेकर जो भी असंतोष था, उसे साध लिया गया है। दरअसल पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक मंत्रियों और भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच विभागों को लेकर खींचतान बताई जा रही है।

इस बीच भाजपा के कई दिग्गज नेता भी अब सिंधिया पर तीर चलाने से भी नहीं चूक रहे हैं, लेकिन एक बड़ा सच यह भी है कि सिंधिया भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की पसंद बने हैं और हर फैसले में उनकी ही मर्जी चल रही है। सियासी गलियारों में तो बात यहां तक होने लगी है कि सिंधिया को तरजीह देकर भाजपा राजस्थान में भी निशाना साधना चाहती है।

सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व किसी भी हाल में सिंधिया का प्रभाव कम नहीं होने देना चाहता है। सिंधिया भाजपा से राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं और निकट भविष्य में उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में भी शामिल किए जाने के संकेत हैं।

सिंधिया के रिश्तों से राजस्थान में समीकरण बनने की गुंजाइश दरअसल, सिंधिया के जरिए कांग्रेस में सेंध लगाकर कमल नाथ सरकार को अपदस्थ करने वाली भाजपा उनके रिश्तों की बदौलत ऑपरेशन राजस्थान के लिए समीकरण बनाने की गुंजाइश तलाश रही है।

सिंधिया इसमें सहायक साबित हो सकते हैं। अव्वल तो ज्योतिरादित्य की राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया बुआ हैं और दूसरे वहां के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट उनके अभिन्न मित्र हैं। राजस्थान के कुछ कांग्रेसी विधायकों से भी उनके गहरे संबंध बताए जाते हैं।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट की प्रतिस्पर्धा जगजाहिर है। अगर राजस्थान में सत्ता के उलटफेर का खेल शुरू हुआ तो समीकरण बनाने के साथ ही वसुंधरा राजे और सचिन पायलट के बीच समन्वय बनाने में भी सिंधिया कारगर साबित हो सकते हैं।

Exit mobile version