सामाजिक असंतुलन से घबराए कमलनाथ, जातिगत दलदल में फंसी कांग्रेस!

भोपाल। कमलनाथ से मुलाकात के बाद अलग-अलग समाज ने टिकट की दावेदारी की थी. इसके बाद बसपा और सपा से गठबंधन की चर्चा के बाद कांग्रेस ने लोगों को टिकट देने के वादे को सर्वे में उलझा दिया है.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद कमलनाथ बार-बार कह रहे हैं कि उनके सामने समय के साथ संगठन को मजबूत करने की सबसे बड़ी चुनौती है. कमलनाथ ने कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूती देने के लिए समाज को अपने साथ जोड़ने के फॉर्मूले पर काम शुरू किया था.
कमलनाथ प्रदेशभर में रहने वाले अलग-अलग जाति के लोगों से मुलाकात की. अभी भी इन मुलाकातों का सिलसिला जारी है. कमलनाथ एक दर्जन से ज्यादा जाति के प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात कर उन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट देने का आश्वासन भी दे चुके हैं.
कमलनाथ ने सबसे पहले सिंधि समाज से मुलाकात की थी, इसके बाद ये सिलसिला जैन, साहू, मांझी, यादव, राजपूत, मीना, गुर्जर, लोधी, मुस्लिम, क्रिस्चन, बोहरा, बाल्मिकी, माली समेत दूसरी जाति तक पहुंचा. इतनी बड़ी संख्या में समाज के लोगों को टिकट देना कमलनाथ के लिए मुश्किल है, ऐसे में आश्वासन देकर कांग्रेस ने समाज के लोगों को सर्वे की शर्त में उलझा दिया है.
सामाजिक असंतुलन से घबराई कांग्रेस
सूत्रों की माने, तो कई समाज के लोगों ने टिकट नहीं देने पर कांग्रेस का चुनाव के दौरान विरोध करने का फैसला भी लिया है. सामाजिक असंतुलन से घबराई कांग्रेस अब सर्वे का हवाला देकर जाति और उससे जुड़े समाज को मनाने में जुट गई है.
कांग्रेस ने समाज के लोगों को टिकट देने का आश्वासन तो दे दिया, लेकिन यही दांव अब उसे उलटा पड़ता दिखाई दिया है. इधर, बीजेपी भी कई समाजों से संपर्क में है. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस की हालत खराब है और प्रदेश में कोई भी समाज उसका साथ नहीं देगी.








