सरहद पर तनाव में लोगो को मिल पाएगी शक्कर और शरबत की सौगात, जानिये पूरी कहानी
जम्मू।तनाव के बावजूद भारत-पाकिस्तान के सरहदी गांवों में बाबा दिलीप सिंह की मजार की ‘शक्कर’ और ‘शरबत’ के लिए खासी बेताबी है। जम्मू संभाग के सांबा की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटी बाबा की मजार की मिट्टी जिसे शक्कर और कुएं का पानी जिसे शरबत कहते हैं, के लिए लोग हर साल उत्साहित रहते हैं।
दोनों मुल्कों के लोगों में बाबा की मजार को लेकर खासी आस्था है। दोनों तरफ बाबा की मजार पर मेला भी लगता है। यह मजार दो हिस्सों में बंटी है। दरगाह का एक हिस्सा पाक के गांव सैदावाली में है और दूसरा भारत के छन्नी फतवाल में।
सात दिन होता है मेला
गांव सैदावाली में चमलियाल मेला सात दिन पहले पारंपरिक रीति रिवाज से शुरू हो जाता है। इस तरफ 27 जून को मेले की तारीख तो निर्धारित हुई है, लेकिन रक्षा मंत्रालय की तरफ से शक्कर और शरबत के आदान-प्रदान पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ। पाक से मेले की तारीख 21 जून तय हुई है।
सांबा प्रशासन ने शुरू की तैयारियां
जीरो लाइन से सटे गांव दग छन्नी में बाबा की मजार जिसे बाबा चमलियाल की दरगाह भी कहा जाता है, पर लगने वाले मेले की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। मेले में करीब ढाई लाख लोग उमड़ते हैं। दरगाह प्रबंधन, जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग, बीएसएफ तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटा है।
अभी नहीं हुआ फैसला
शक्कर-शरबत जिसे बीएसएफ और पाक रेंजर्स आदान-प्रदान करते हैं, पर मसला अटका हुआ है। क्योंकि गृह मंत्रालय ने जीरो लाइन पर मेले से सप्ताह पहले होने वाली फ्लैग मीटिंग पर फैसला नहीं लिया है। विशेष बैठक में अपने-अपने क्षेत्र में मजार की शक्कर-शरबत के आदान-प्रदान पर फैसला लिया जाता है। शक्कर-शरबत के आदान पर फैसला बीएसएफ पर निर्भर करेगा।