Site icon Yashbharat.com

सरकार: शिव के फैसलों पर कैबिनेट की मुहर अनिवार्य

yashbharatnews

भोपाल। मध्यप्रदेश में भले ही भाजपा की सरकार बन चुकी है, लेकिन कोरोना संकट के चलते मंत्रिमंडल का गठन नहीं होने से अकेले मुख्यमंत्री को ही काम करना पड़ रहा है। प्रदेश में यह पहला मौका है, जब मुख्यमंत्री बगैर मंत्रियों के ही काम कर रहे हैं। इस हालात के चलते कोरोना संकट में भी पूरी व्यवस्थाएं अफसरों के भरोसे हैं। खास बात यह है कि सरकार के मुखिया के रुप में जो भी फैसले लिए जा रहे हैं, उन पर भी कैबिनेट की मुहर लगना संवैधानिक अनिवार्यता है। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही माना जा रहा था कि जल्द ही वे अपनी टीम गठित कर लेंगे, लेकिन कोरोना संकट के चलते वे कोरोना से बचाव व रोकथाम में लग गए। लॉकडाउन के चलते फिलहाल 14 अप्रैल के बाद ही कैबिनेट के गठन की संभावना है। संविधान विशेषज्ञों की माने तो मुख्यमंत्री हैं तो कैबिनेट भी होना जरुरी है। राज्य के हितों और प्रशासनिक निर्णयों पर भी कैबिनेट की स्वीकृति जरूरी है। ऐसा नहीं होने की वजह से सवाल खड़े हाने लगे हैं।
प्रोक्टेम स्पीकर का भी बना इतिहास
राज्य में विधानसभा के प्रोक्टेम स्पीकर के कार्यकाल को लेकर भी नया इतिहास बनने जा रहा है। प्राय: प्रोक्टेम स्पीकर कुछ समय के लिए ही नियुक्त होता है, लेकिन प्रदेश में मौजूदा प्रोक्टेम स्पीकर जगदीश देवड़ा का कार्यकाल सबसे लंबा होगा। स्पीकर का चुनाव होने तक प्रोक्टेम स्पीकर ही रहेंगे। वजह है स्पीकर का चुनाव सदन में किया जाता है। सदन में बैठक तीन माह बाद होने की संभावना है।
विभाग में मंत्री होना भी जरुरी
सरकार के विभागों में उनके मंत्री होना भी आवश्यक है। यही वजह है कि संविधान में भी यह व्यवस्था की गई है कि कैबिनेट के निर्णय मान्य होंगे। जानकारों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्य सेवांए निर्बाध चलती रहें, लोगों कोई दिक्कत न हो, इसके लिए मैदानी स्तर पर पैनी नजर रखना जरूरी है। कैबिनेट सदस्य होते तो वे और बेहतर तरीके से कर सकते थे

Exit mobile version