समर्थकों को टिकट दिलवाने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में भी मतभेद!
खंडवा। लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही कांग्रेस के नेता भले ही एक हो गए हों लेकिन कार्यकर्ताओं में अब भी खींचतान जारी है। अपने-अपने नेताओं के माध्मय से टिकट की दरकार लेकर समर्थक सक्रिय हैं। उधर, प्रदेश के बड़े नेता भी अपने-अपने समर्थकों को टिकट दिलवाने के लिए सक्रिय हैं।
खंडवा-बुरहानपुर जिले की छह में से दो सीटों को लेकर वरिष्ठ नेताओं में भी मतभेद हो गए हैं। यहां पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव खासे सक्रिय हैं। उनके सांसद और प्रदेश अध्यक्ष रहते समर्थकों की फौज खड़ी हो गई लेकिन वे भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हैं। इसके अलावा दिग्विजय के समर्थक भी बड़ी संख्या में है। खंडवा विधानसभा में कुंदन मालवीय कमलनाथ समर्थक हैं। प्रदेश अध्यक्ष के नजदीक होने की वजह से वे भी टिकट का स्वप्न पाले बैठे हैं।
मांधाता विधानसभा में ठाकुर राजनारायणसिंह और बेटे उत्तमपालसिंह में से किसी एक को टिकट दिलाने की मशक्कत दिग्विजयसिंह कर रहे हैं। अरुण यादव किसी भी हाल में ठाकुर को टिकट दिलाने के पक्ष में नहीं है। लोकसभा चुनाव के समय राजनारायणसिंह द्वारा की गई बगावत को यादव भूले नहीं हैं। यही वजह है कि यहां से उनके समर्थक नारायण पटेल और सिंधिया समर्थक परमजीतसिंह नारंग भी टिकट की आस में है। राहुल ब्रिगेड से जुड़ी प्रतिभा रघुवंशी भी दावेदारी तो कर रही है।
कई दावेदार हैं सामने
बुरहानपुर से सुरेंद्रसिंह (शेरा भैया) सिंधिया के माध्यम सीधे राहुल गांधी से मिल चुके हैं तो अजय रघुवंशी अरुण यादव से टिकट की आस लगाए हुए हैं। पंधाना सीट पर दावेदारी में छाया मोरे भी दौड़ में है। लेकिन ऐन मौके पर भाजपा के मंत्री कुंवर विजय शाह के बड़े भाई अजय शाह को भी कांग्रेस मैदान में उतारकर चौंका सकती है। हरसूद में कांग्रेस के सुखराम सालवे सहित कुछ अन्य के नाम दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। कार्यकारी अध्यक्ष बाला बच्चन ने भाजपा का किला ढहाने का दावा किया था लेकिन जमीनी स्तर पर कोई पुख्ता रणनीति नजर नहीं आ रही है।
बहुत खो दिया, अब तो एक हैं
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता परमजीतसिंह नारंग ने गुटबाजी के सवाल पर कहा कि अब तक हमने बहुत कुछ खो दिया है। अब कांग्रेस एक है। इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है। हम एक होकर चुनाव लड़ेंगे। टिकट के लिए दावेदारी घर का मामला है।