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सपने में आया कोरोना, आई खांसी तो हो गए क्वारंटाइन

Anti Virus Mask

देश के बड़े से बड़े डॉक्टर यही सलाह दे रहे हैं कि कोरोना से घबराने की जरूरत नहीं है। करीब 85 फीसदी लोगों सर्दी-जुकाम जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं। इसके बाद भी भोपाल में कई लोगों पर कोरोना का डर सिर चढ़कर बोल रहा है। हालत यह है कि सपने में आकर कोरोना डरा रहा है। कई लोगों की नींद हराम हो गई। ऊपर से लॉकडाउन व क्वारंटाइन होने की वजह से लोगों की मानसिक स्थिति और बिगड़ रही है।

गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के मनोचिकित्सा विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. आरएन साहू ने बताया कि कोरोना का डर, लॉकडाउन के चलते में घर में रहने, बिजनेस में नुकसान के चलते एंग्जायटी डिसआर्डर, डिप्रेशन आदि मिलाकर करीब 40 फीसदी मरीज बढ़े हैं। कुछ को भर्ती भी करना पड़ रहा है।

मनोचिकित्सक सत्यकांत त्रिवेदी ने कहा कि बीमारियों को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। इसे हाइपोकॉन्ड्रियासिस कहते हैं। इसमें घबराहट व बेचैनी होती है। उन्होंने कहा कि 30 से 40 फीसदी मनोरोगी के कोरोना संक्रमण आने के बाद बढ़े हैं। यही बात डॉ. प्रीतेश गौतम ने कही।

केस 1 – बर्रई (कटारा हिल्स) में रहने वाली एक बैंककर्मी को कोरोना का इस कदर डर हुआ कि उन्होंने अपनी डेढ़ साल की बच्ची को भी खुद से अलग कर लिया। वह क्वारंटाइन हो गईं। हल्की सी खांसी में उन्हें लगा कि वह कोरोना से संक्रमित हो गईं। जांच कराई तो नेगेटिव आई। बिना मास्क पहने हुए लोगों को देखतीं तो पुलिस बुला लेतीं । मनोचिकित्सक डॉ. आरएन साहू की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। डॉ. साहू के मुताबिक महिला की हालत में अब काफी सुधार है।

केस 2 – 65 साल के एक व्यक्ति कोरोना से इतना डरे है कि उन्हें डरावने सपने आने लगे। सपने भी कोरोना से जुड़े आ रहे हैं। उन्होंने मनोचिकित्सक ने जब काउंसिलिंग की तो उन्होंने बताया कि ऐसे सपने आते हैं कि कोरोना से संक्रमित होने की बाद उनकी हालत गंभीर हो गई है। उन्हें कोई छूना नहीं चाहता। मनोचिकित्सक डॉ. प्रीतेश गौतम ने उनकी काउंसलिंग की। उन्हें समझाया कि कोरोना से इस तरह डरने की जरूरत नहीं है। यह अन्य बीमारियों की तरह ही साधारण बीमारी है। डॉ. गौतम ने उन्हें समझाया कोरोना के बार में बिल्कुल न सोचें। दूसरे काम में मन लगाएं।

केस 3 – कुछ गर्भवती महिलाओं को कोरोना की चिंता उनके साथ उनके होने वाली संतान के लिए सता रही है। मनोचिकित्सकों से सबसे पहले वह यह पूछ रही हैं कि उन्हें कोरोना तो नहीं है। इसके बाद अगला सवाल होता है कि गर्भ में पल रहे शिशु को कोरोना तो नही हो जाएगा। मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने बताया कि हफ्ते भर के भीतर उनके पास ऐसे तीन केस आ चुके हैं। डॉ. त्रिवेदी ने उनकी काउंसिलिंग की और बताया कि बच्चे पर कोई असर नहीं होता।

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