शोध में दावा, कोरोना वायरस से लड़ाई में कारगर साबित हो सकता है रैपामाइसिन ड्रग

भोपाल । भोपाल स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) तथा अमेरिका की यूनिवर्सिटी आफ नेब्रास्का मेडिकल सेंटर (यूएनएमसी) के विज्ञानियों ने शोध में पाया है कि कैंसर के उपचार में उपयोग आने वाली दवा रैपामाइसिन कोरोना के उपचार में भी कारगर सिद्ध हो सकती है। यह दवा शरीर में कोरोना वायरस की संख्या बढ़ने से रोकती है। यह रिसर्च पेपर अमेरिकी जर्नल ‘कैमिको-बायलॉजिकल इंटरेक्शंस’ में प्रकाशित भी हुआ है।

आइसर, भोपाल के प्रमुख विज्ञानी डा. अमजद हुसैन और यूएनएमसी के एसोसिएट प्रोफेसर सिदप्पा वायरा रेड्डी ने यह शोध किया है। हुसैन ने बताया कि पहले आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिये देखा कि रैपामाइसिन कोरोना के इलाज के लिए कई एंगल पर काम कर सकती है। वर्तमान में इस दवा का इस्तेमाल अंग प्रत्यारोपण, कैंसर व एंटी-एजिंग (आयु बढ़ने से होने वाली शारीरिक कमजोरी नियंत्रित करने) में किया जाता है।

रैपामाइसिन पहले से कुछ बीमारियों के उपचार में उपयोग आ रहा है। इसका मतलब है कि यह मनुष्य के लिए नुकसानदेह नहीं है। डा. हुसैन ने इस पर लाकडाउन के दौरान अप्रैल, 2020 में प्रयोग शुरू किया था, नवंबर, 2020 में उन्हें सफलता मिली।

इन दो तरीकों से कोरोना को रोकेगी रैपामाइसिन : 1. रैपामाइसिन शरीर की कोशिकाओं को विभाजित नहीं होने देती। कोशिकाएं विभाजित नहीं होने से वायरस की संख्या नहीं बढ़ेगी और कोरोना नियंत्रित होगा। 2. यह दवा शरीर में कोरोना वायरस के प्रोटीन बनने से रोकती है, जिससे कोरोना स्वतः नियंत्रित होगा।

 

यूएनएमसी में चल रहे टेस्ट : डा. हुसैन ने बताया कि रिसर्च जर्नल में प्रकाशित होने के बाद यूएनएमसी में इस दवा पर कुछ टेस्ट चल रहे हैं। विज्ञानियों ने लैब में कोशिकाओं पर वायरस डाला। उसके बाद वायरस पर रैपामाइसिन का उपयोग किया तो पाया कि वायरस की संख्या नहीं बढ़ी। गौरतलब है कि अमेरिका में यूएनएमसी ने ही कोरोना के इलाज के लिए रेमडेसिविर का ट्रायल किया था।

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