इंदौर। शिप्रा के बाद अब नर्मदा नदी को गंभीर नदी से लिंक करने की तैयारी पूरी हो गई है। 15 जुलाई को नर्मदा का जल इंदौर और उज्जैन के गांवों तक पहुंच जाएगा।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने गुरुवार को बड़वाह से बलवाड़ा (15 किलोमीटर) तक नर्मदा जल पहुंचाने का सफल परीक्षण कर लिया है। अब पहाड़ तक पानी चढ़ाकर इंदौर जिले में पहुंचाने का काम बाकी है। शेष हिस्से में टेस्टिंग के लिए 15 दिन का लक्ष्य रखा गया है।
इस प्रोजेक्ट के तहत डेढ़ साल से जंगलों में बड़े पाइप बिछाए जा रहे हैं। चार पंपिग स्टेशन बनकर तैयार हो चुके हैं और ज्यादातर हिस्सों में पाइप भी बिछाए गए हैं। कुछ स्थानों पर लाइनें जुड़ना शेष है। उधर, बड़ी कलमेर गांव के पास एक संगम स्थल भी तैयार किया जा रहा है। ओंकारेश्वर से आने वाली नहर के पानी को बड़वाह के नजदीक से लिफ्ट कर गंभीर नदी के उद्गम स्थल तक भेजा जाएगा। बड़वाह से मुख्त्यारा बलवाड़ा, आंबा चंदन, मेमंदी गांव तक पानी पहुंचाया जाएगा और फिर इंदौर-उज्जैन के गांवों में पहुंचाया जाएगा।
रेलवे लाइन बनी रोड़ा : विभाग ने 68 किलोमीटर तक 3 हजार एमएम व्यास के पाइप बिछा दिए हैं। चोरल के पास रेल लाइन के नीचे से पाइप लाइन बिछाई जाना शेष है। इसके अलावा राऊ के समीप भी हाईवे के नीचे से लाइन बिछाई जाना है। अफसरों का कहना है कि रेलवे से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन बारिश के कारण काम शुरू नहीं किया। सिर्फ 800 मीटर लंबाई के पाइप बचे हैं। उन्हें जोड़ दिया तो प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा।
50 हजार हेक्टेयर में सिंचाई गांवों को मिलेगा पानी
योजना के तहत 50 हजार हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा। तय स्थानों पर पाइप के आउटलेट छोड़े जाएंगे, जहां से किसान सिंचाई के लिए खेतों में पानी ले सकते हैं। इसके अलावा, इंदौर, उज्जैन के सैकड़ों गांवों में इस प्रोजेक्ट से पेयजल सप्लाई होगी।
नदी से पानी लिफ्ट करने की सबसे बड़ी परियोजना
नर्मदा नदी से पानी लिफ्ट कर शहरों और गांवों तक पहुंचाने के लिए नर्मदा-गंभीर सबसे बड़ी परियोजना है। 1800 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में 1300 एमएलडी पानी नदी से लिफ्ट किया जाएगा। अभी तक नर्मदा के 3 चरणों से इंदौर में 510 एमएलडी पानी आ रहा है। नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना में 400 एमएलडी पानी ले रहे हैं। बाद में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त जल मिल सकेगा।
गंभीर में भी समाएगी नर्मदा
गंभीर नदी में नर्मदा जल छोड़ने के लिए कलमेर गांव में नदी किनारे ही एक संगम स्थल आकार ले रहा है, जिसमें तीन घाट बन रहे हैं। यहां पाइप के जरिए नर्मदा जल छोड़ा जाएगा, जो नहर से होकर गंभीर नदी में मिलेगा। इसकी मात्रा इतनी नहीं होगी कि शिप्रा नदी की तरह लबालब हो सके। गंभीर नदी पर बने यशवंत सागर डेम को भी इससे फायदा नहीं होगा, क्योंकि नर्मदा जल पाइप के जरिए गांवों तक पहुंचेगा।
कुछ हिस्सों में बचा है काम
कुछ ही हिस्सों में लाइन जुड़ने का काम बचा है। उसे 15 दिन में पूरा किया जाएगा। इसके बाद पूरे प्रोजेक्ट की टेस्टिंग पूरी हो जाएगी और किसानों को फायदा मिल सकेगा। प्रोजेक्ट का फायदा दो जिलों को मिलेगा। –एचआर चौहान, चीफ इंजीनियर, एनवीडीए

