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शहीद दिवस : जब अलीगढ़ में भगत सिंह ने कहा था, मेरी भारत मां बीमार है…

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मेरी मां यानि भारत मां बीमार है, अब उन्हें आजाद कराकर ही लौटूंगा… यह वो आखिरी शब्द थे जो शहीद भगत सिंह अलीगढ़वासियों से कहे थे। वह वेश बदलकर 18 महीने तक मुख्यालय से करीब 40 किमी. दूर पिसावा क्षेत्र के गांव शादीपुर में रहे थे। यहां रहते हुए स्कूल का संचालन करते हुए बच्चों को शिक्षित करने का भी काम किया था।

अलीगढ़ के गांव शादीपुर निवासी स्वतंत्रता सेनानी टोडर सिंह के परिजन बताते हैं कि शहीद भगत सिंह के घरवालों ने जब शादी का दबाव बढ़ाया तो वह दिसंबर 1923  में घर से भाग निकले थे। कानपुर की बैठक में क्रांतिकारी गणेश शकर विद्यार्थी ने टोडर सिंह से भगत सिंह को अपने साथ अलीगढ़ ले जाने को कहा। भगत सिंह कुछ रोज शहर से सटे खेरेश्वर मंदिर में वेश बदलकर रहे। जब वह गांव शादीपुर पहुंचे थे तो उनका परिचय बलवंत सिंह के नाम से कराया गया था। उन्होंने नेशनल स्कूल खोला और बच्चों को न सिर्फ नेक इंसान बनने के लिए प्रेरित किया, बल्कि देश की खातिर मर-मिटने का अमर संदेश भी दिया।

एक शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने लोगों से कहा कि उन्हें जाना होगा। गांव के लोगों ने पूछा तो जवाब मिला कि उनकी मां बीमार है। जिसके बाद गांव के लोग खुर्जा स्टेशन पर छोड़ने गए। तब तक लोगों को यह पता नहीं था कि उनके बीच रहने वाले कोई और नहीं बल्कि भगत सिंह थे। यहां से जाकर भगत सिंह ने लाहौर में नौजवान सभा को सक्रिय किया। उनकी पहली गिरफ्तारी 1927 में लाहौर से तब हुई, जब दशहरे के मौके पर बम-कांड हुआ। 17 अगस्त 1928 को भगत ने सांडर्स की हत्या कर दी और फरार हो गए। आठ अप्रैल 1929 को सेंट्रल असेंबली (आज की संसद) में बम फेंका और गिरफ्तारी दी। फासी से दो दिन पहले 21 मार्च 1931 को टोडर सिंह ने लाहौर जेल में भगत सिंह से मुलाकात भी की थी।

देश प्रेम में बांटे पर्चे
अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजा देने के लिए वह यहां से भी लोगों को देश-प्रेम के पर्चे बाटा करते थे। ठा. टोडर सिंह ने उनके लिए एक साइक्लोस्टाइल का बंदोबस्त कर दिया था। वह हाथ से पर्चे लिखते और साइक्लोस्टाइल से छापकर उसे बच्चों के जरिये बंटवा दिया करते। एक दिन भगत सिंह ने गांव वालों से कहा था कि वह अब अपने घर जाएंगे। लोगों ने कारण पूछा? तब भगत सिंह ने बाबा से कहा, मेरी मां बीमार हैं, मुझे जाना ही होगा

23 मार्च को शहादत दिवस पर होते हैं कार्यक्रम
गांव में शादीपुर गांव के लोग शहीद दिवस मनाते आ रहे हैं। मंगलवार को भी गांव में शहीद दिवस मनाया जाएगा। जिसमें रागिनी आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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