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विवाह के लिए अब सिर्फ 5 मुहूर्त, एकादशी के बाद करना पड़ेगा लंबा इंतजार

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धर्म डेस्क। सनातन संस्कृति के अनुरुप शास्त्रीय परंपराओं को मानने वालों के लिए अब मात्र पांच मुहूर्त ही श्रेष्ठ बचे हैं। जून माह में मात्र एक मुहूर्त और जुलाई में चार मुहूर्त हैं। यदि इन पांच मुहूर्तों में विवाह योग्य संतानों का ब्याह नहीं किया गया तो फिर युवाओं को सात फेरे लेने के लिए चार माह का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। इसका कारण यह है कि 12 जुलाई को देवशयनी एकादशी पड़ रही है।

इस दिन से भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करने चले जाएंगे। वे चार महीने पश्चात देवउठनी एकादशी को जागेंगे। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान विष्णु का शयनकाल होता है तो उस दौरान किसी भी तरह का शुभ संस्कार संपन्न नहीं किया जाता। इसे चातुर्मास काल भी कहा जाता है।

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