बेंगलुरु। जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। यह दूसरी बार है जब वो राज्य के मुख्यमंत्री होंगे। उनके अलावा जी परमेश्वर ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल विजुभाई वाला ने दोनों को शपथ ग्रहण करवाई।
किंग साबित हुए स्वामी
कर्नाटक जद (एस) प्रमुख एच डी कुमारस्वामी ने चुनाव से पहले दावा किया था कि वह ‘किंगमेकर’ नहीं बल्कि ‘किंग’ होंगे। उनकी यह बात सही साबित हुई और अपनी पार्टी को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में मात्र 37 सीटें मिलने के बावजूद वह राज्य के मुख्यमंत्री बने। अपने पिता एवं पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा से मौके का सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल अपने पक्ष में करने का गुण सीखने वाले कुमारस्वामी ने आज राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।

कुमारस्वामी का राजनीति में प्रवेश 1996 में कनकपुरा से लोकसभा चुनाव लडऩे और जीत दर्ज करने से हुआ। 2004 में वह विधानसभा के लिए चुने गए जब जदएस ने त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में कांग्रेस की धर्म सिंह नीत सरकार का समर्थन किया था। इसके बाद 2006 के शुरूआत में कुमारस्वामी ने अपनी पार्टी को खतरा बताते हुए देवेगौड़ा के विरोध के बावजूद सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। कुमारस्वामी ने इसके बाद भाजपा के समर्थन से सरकार बनायी और मुख्यमंत्री बने। पार्टी में उनका कद इस तेजी से बढ़ा कि इससे उनके परिवार में विवाद उत्पन्न हो गया क्योंकि उस समय तक उनके बड़े भाई एच डी रेवन्ना को गौड़ा का उत्तराधिकारी माना जाता था। उसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया भी यह महसूस करने लगे कि उन्हें किनारे किया जा रहा है। सिद्धरमैया ने कथित असंतुष्ट गतिविधियां शुरू कर दीं जिसके चलते उन्हें जदएस से निष्कासित कर दिया गया।
कुमारस्वामी 20-20 महीने सत्ता साझा करने के समझौते का सम्मान करने में असफल रहे जिसके चलते भाजपा 2008 में पहली बार दक्षिण भारत के इस राज्य में सत्ता में आयी। जद(एस) उसके बाद सत्ता से बाहर रही। कुमारस्वामी ने हाल में पीटीआई से कहा था कि यह चुनाव उनकी पार्टी के लिए ‘‘अस्तित्व की लड़ाई’’ है। इस लड़ाई में अपनी पार्टी को कर्नाटक की सत्ता पर ला चुके कुमारस्वामी के लिए अब एक नयी चुनौती मुंह खोले खड़ी है और वह है पांच साल राज्य में गठबंधन सरकार चलाना।












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