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वास्तु के कारण ज्यादा सकारात्मक व निर्णशील नहीं हैं प्रदेश के मंत्री, होगा मंत्रालय में सुधार

भोपाल। राजधानी में छह दशक पुराने मंत्रियों के बंगलों पर उनके दफ्तरों के दिन फिरने वाले हैं। सरकार अपने हर मंत्री के कार्यालय पर 24 लाख रुपए खर्च करने जा रही है। नए दफ्तर एक हजार वर्गफीट क्षेत्र में बनेंगे।

डिजाइन पूरी तरह वास्तुशास्त्र पर आधारित है। जिसमें कार्यालय के मुख्य द्वार से लेकर मंत्री और उनके स्टाफ की बैठक व्यवस्था, रंग-रोगन, खिड़की और पेड़ पौधों को पूरा ध्यान रखा गया है। वास्तु पर जोर की मुख्य वजह मंत्री में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता की वृद्धि करना है।

सरकार के मंत्री पिछले कई सालों से बंगलों पर स्थित कार्यालय को व्यवस्थित बनाने की मांग करते आ रहे हैं। इसके पीछे मंत्रियों का तर्क है कि मौजूदा कार्यालय बंगले के साथ ही 60 साल पहले बनाया गया था। तब मंत्री स्टाफ काफी सीमित हुआ करता था।

अब परिस्थिति काफी बदल चुकी है और कार्यालय भी काफी पुराने हो चुके हैं। लिहाजा मौजूदा जरूरतों के मुताबिक कार्यालय बनाए जाने चाहिए। मंत्रियों की इस मांग के मद्देनजर सरकार ने पीडब्ल्यूडी विभाग को नए कार्यालय बनाए जाने का जिम्मा सौंपा है।

नई डिजाइन में मंत्री का कार्यालय निवास से अलग होगा। स्टाफ के लिए भी सर्वसुविधायुक्त व्यवस्था होगी। कार्यालय में स्टाफ रूम, मंत्री के चैंबर के अलावा भी दो अलग कक्ष होंगे। फायर सेफ्टी एंड अलर्ट सिस्टम, आलर्म सिस्टम, माड्यूलर कवर्ड, आधुनिक अलमारी के साथ आगंतुकों व वीआईपी बैठक व्यवस्था अलग-अलग होगी।

वास्तुशास्त्र के अनुसार ऐसे होगा निर्माण

– (वास्तुशास्त्री पंडित कमलेश शर्मा के मुताबिक)

पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने बताया कि नए कार्यालयों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसी क्रम में पहले कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव, उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस के सरकारी बंगलों पर निर्माण कार्य किया जाएगा। जबकि, मंत्री गौरीशंकर बिसेन के बंगले पर निर्माण कार्य जारी है।

निर्माण चल रहा है

मंत्रियों के सरकारी बंगलों पर कार्यालय निर्माण का काम किया जा रहा है। विभाग ने इसकी तैयारी भी पूरी कर ली है। चरणबद्ध तरीके से काम पूरा किया जाएगा। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने सर्वे भी करा लिया है।

संजय खांडे, एसई, पीडब्ल्यूडी

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