लॉकडाउन से संक्रमण की चेन टूटी; 30 दिन पहले 4% मरीज सामने आ रहे थे, अब टेस्टिंग 33% बढ़ी पर केस 4% ही सामने आ रहे

नई दिल्ली. लॉकडाउन के 30 दिन पूरे होने पर गुरुवार को इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने राहत की खबर दी। आईसीएमआर के निदेशक सीके मिश्र ने कहा कि 30 दिन के भीतर देश में कोरोना की टेस्टिंग में 33% इजाफा हुआ है, लेकिन मरीजों की संख्या में नहीं। मिश्र ने बताया कि 23 मार्च तक पूरे देश में 14,900 लोगों का टेस्ट किया गया था, तब 400 यानी 4% लोग संक्रमित पाए गए हैं। आज भी टेस्टिंग में संक्रमण के 4% मामले ही सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए राहत की बात है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की वजह से देश को तीन फायदे हुए हैं। पहला- संक्रमण की चेन टूटी है, दूसरा- केसों का डबलिंग रेट कम हुआ है और तीसरा- ज्यादा से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग हो रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें खोलने की भी अनुमति

गृह मंत्रालय ने नॉन कंटेनमेंट इलाकों और नॉन हॉटस्पॉट इलाकों के लिए बड़ी छूट का ऐलान किया। मंत्रालय की संयुक्त सचिव पीएस श्रीवास्तव ने बताया कि ऐसे इलाकों में सड़क निर्माण कार्य, ईंट-भट्‌टे, दूध, ब्रेड, आटा, दाल मिलों, किताबों की दुकानें खोलने की इजाजत दे दी गई है। गर्मी के मौसम में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानें भी खोली जाएंगी। जो इलाके हॉटस्पॉट जोन में नहीं हैं, वहां राज्य सरकारें उद्योगों को शुरू करवा रही हैं।

भारत की स्थिति यूके, अमेरिका और इटली जैसे देशों से बेहतर- आईसीएमआर
डॉ. मिश्रा ने कहा- अमेरिका में 26 मार्च तक 5 लाख लोगों का टेस्ट किया था। इनमें 80 हजार संक्रमित पाए गए थे। इटली में 31 मार्च तक 5 लाख लोगों का टेस्ट हुआ और इनमें एक लाख कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। यूके में 20 अप्रैल तक 5 लाख लोगों का टेस्ट हुआ और इनमें एक लाख 20 हजार संक्रमित मिले। तुर्की में 16 अप्रैल तक 5 लाख लोगों का टेस्ट हुआ और इनमें 80 हजार लोग संक्रमित पाए गए। भारत में 22 अप्रैल तक 5 लाख लोगों का टेस्ट हुआ, जिनमें करीब 20 हजार ही संक्रमित पाए गए। ऐसे में अन्य देशों के मुकाबले भारत में स्थिति काफी बेहतर है।

संक्रमित मरीजों के ठीक होने की दर बढ़ी

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