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लॉकडाउन में वृद्धि नहीं होने की घोषणा के बाद रेल, विमान व बस सेवाओं में बुकिंग बढ़ी

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नई दिल्ली। कोरोना को लेकर लागू लॉकडाउन के आगे नहीं बढ़ने के सरकार के आश्वासन के साथ ही लोगों में 15 अप्रैल और आगे की तारीखों के ट्रेन, विमान और बसों के टिकट बुक कराने की होड़ मची है। लॉकडाउन के बाद लोग जल्द से जल्द काम पर लौटने तथा अपना कारोबार जमाने को बेताब हो सकते हैं। लिहाजा अप्रैल-मई-जून महीनों की बुकिंग के लिए रेलवे, एयरलाइन तथा राज्य परिवहन निगमों की वेबसाइटों पर हिट्स बढ़ने लगी है। आइआरसीटीसी के एक अधिकारी के अनुसार, उनके पास फोन आ रहे हैं जिसमें लोग पूछ रहे हैं कि 15 अप्रैल के बाद किस तारीख का टिकट उपलब्ध है क्योंकि उन्हें चुनिंदा ट्रेनों में अगले कुछ दिनों का आरक्षण नहीं मिल रहा है। रेलवे ने 23 मार्च को 31 मार्च तक यात्री ट्रेनों का संचालन बंद करने की घोषणा की थी। 24 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के बाद इसे 14 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया।

इसी प्रकार विमानन मंत्रालय ने पहले अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 22 मार्च से 31 मार्च तक रोक लगा दी थी जिसे 14 अप्रैल तक बढ़ाया गया। घरेलू उड़ानों को भी पहले 31 मार्च तक और फिर 14 अप्रैल तक के लिए बंद करने की घोषणा की गई। ऐसे में रेलवे और एयरलाइंस दोनों ही 15 अप्रैल और उसके बाद की तारीखों की बुकिंग स्वीकार कर रही थीं। लेकिन लॉकडाउन बढ़ने की आशंका के चलते लोग बुकिंग कराने से झिझक रहे थे। मंगलवार को कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने ऐसी खबरों का खंडन किया और फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं होने का बयान दिया। परिवहन क्षेत्र को भारी नुकसानलॉकडाउन के तहत देश में ट्रेन और विमान के अलावा बसों, टैक्सियों का भी संचालन लगभग बंद है। केवल आवश्यक वस्तुओं, मेडिकल के सामान व दवाओं की ढुलाई तथा सुरक्षा बलों के जवानों की आवाजाही के लिए मालगाडि़यां, कारगो विमान सेवाएं जारी हैं।

सामान्य यात्री सेवाओं पर पाबंदी तथा सीमित माल परिवहन होने से रेलवे व एयरलाइंस के साथ-साथ ट्रांसपोर्टरों तथा बस आपरेटरों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार लॉकडाउन की 21 दिन की अवधि में भारतीय परिवहन क्षेत्र को 50 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

रेलवे को लग सकता है 7500 करोड़ का झटका

रेल मंत्रालय के आकलन के मुताबिक, लॉकडाउन से रेलवे को यात्री और माल यातायात में तकरीबन 7500 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। इसमें से 2500 करोड़ रुपये का नुकसान 24 से 31 मार्च के दौरान, जबकि बाकी 5000 करोड़ रुपये का नुकसान एक से 14 अप्रैल के दौरान होने का अनुमान है। रेलवे ने 2019-20 के दौरान 1.90 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा था। जिसे आर्थिक सुस्ती के कारण घटाकर 1.80 लाख करोड़ दिया गया था। लॉकडाउन के बाद इसमें और कटौती कर 1.75 लाख करोड़ रुपये करना पड़ा है। रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, रेलवे को माल ढुलाई में रोजाना 200 करोड़ और यात्री सेवा में 150 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

विमानन क्षेत्र पर 10500 हजार करोड़ की मार

इसी प्रकार भारतीय विमानन क्षेत्र को भी 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की चोट पड़ने वाली है। सेंटर फार एविएशन ‘कापा’ की रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन के कारण भारतीय एयरलाइंस के करीब 150 विमान खड़े हो गए हैं। एयर इंडिया के अनुसार, उसे रोजाना 30-35 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। मार्केट लीडर इंडिगो का नुकसान इससे दोगुना हो सकता है।सड़क परिवहन को 31000 करोड़ की चपत का अनुमानसड़क परिवहन क्षेत्र का कोई सही आंकड़ा तो उपलब्ध नहीं है। लेकिन इस क्षेत्र के जानकारों का अनुमान है ट्रक व बस ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को भी लॉकडाउन से रोजाना 1500 करोड़ रुपये के भाड़े व किराये का नुकसान हो रहा होगा

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