नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण के चलते देश में पिछले 24 मार्च से लागू लॉकडाउन (lockdown) के बीच बच्चों की तस्करी बढ़ने का मामला सामने आया है. लॉकडाउन के दौरान बच्चों की तस्करी (child trafficking) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भी चिंता जताई है और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दो हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा कि बच्चों की तस्करी इसलिए हो रही है क्योंकि इसका एक बाजार है. बच्चों की तस्करी कर उन्हें काम पर लगा दिया जाता है. लड़कियों को वेश्यावृत्ति में डाल दिया जाता है. इस पर तुरंत कोई बड़ा फैसला लेने की जरूरत है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी की गैर सरकारी संस्था बचपन बचाओ आंदोलन की याचिका पर सुनवाई करते हुए की. याचिका में कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान बच्चों की तस्करी बढ़ गई है.
जस्टिस बोबडे ने कहा कि बच्चों की तस्करी रोकने कर लिए ठेकेदारों पर लगाम कसना बेहद जरूरी हो गया है. ठेकेदार सस्ती कीमत पर बच्चों को काम पर लगा देते हैं. ऐसे में जरूरी है कि अब ठेकेदारों का रजिस्ट्रेशन कराया जाए. इस तरह सरकार उन पर नजर रख पाएगी की वह किसको काम दे रहे हैं. जस्टिस बोबडे ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को खास तौर पर इस पर काम करने के लिए कहा.
कोर्ट ने सरकार और याचिकाकर्ता से कहा कि बच्चों की तस्करी क्यों हो रही है इस पर थोड़ा रिसर्च करें और जवाब दाखिल करें. इसके साथ ही ये भी बताएं की इस मसले का हल क्या है. अगर जरूरत पड़ी तो कोर्ट इस पर एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन करेगा. इस मामले की अगली सुनवाई अब दो हफ्ते के बाद होगी.

