मुंबईः अंतर बैंक विदेशी विनिमय बाजार में आज कारोबार के दौरान रुपया 42 पैसे की जोरदार गिरावट के साथ 70.52 प्रति डॉलर के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया। डॉलर की माह अंत की मांग तथा विदेशी कोषों की निकासी से रुपए में गिरावट आई। बैंकों तथा आयातकों की सतत डॉलर मांग से रुपया दबाव में आ गया। कच्चे तेल के दाम बढऩे से मुख्य रूप से तेल रिफाइनरी कंपनियों की डॉलर मांग बढ़ी है।
22 पैसे गिरकर खुला रुपया
इससे पहले आज शुरुआती कारोबार में रुपया 22 पैसे टूटकर 70.32 प्रति डॉलर पर आ गया। कल के कारोबार में रुपया 6 पैसे की बढ़त के साथ 70.10 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। बाद में यह और टूटकर 70.52 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। कारोबारियों ने कहा कि विदेशी बाजारों में अन्य मुद्राओं की तुलना में डॉलर की मजबूती से भी रुपया प्रभावित हुआ।
रुपए में गिरावट की वजह
एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऑयल इम्पोर्टर्स और विदेशी बैंकों की तरफ से सरकारी बैंकों द्वारा बिक्री से रुपया गिर गया। इससे पहले 16 अगस्त को रुपया एक समय 70.40 तक टूट गया था जो इसका न्यूनतम स्तर है।
सरकार को सलाह
बता दें कि मंगलवार को ही नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि भारतीय मुद्रा को अपना ‘प्राकृतिक स्तर’ खोजने की छूट देनी चाहिए और मजबूत रुपये को बेहतर मानने का लोगों में विश्वास एक भ्रम है। वहीं दूसरी तरफ आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने इससे पहले कहा था कि रुपये की विनिमय दर में गिरावट से अभी कोई चिंताजनक स्थित नहीं पैदा हुई है पर सरकार को बढ़ते चालू खाते के घाटे (कैड) पर ध्यान रखना होगा।

