कम्प्यूटर बाबा के कम्प्यूटर में राजनीति का वायरस इस तरह घुसा कि आज उन्हें जेल तक जाना पड़ा। फिलहाल तो बाबा के कम्प्यूटर को राजनीति के वायरस ने क्रेस कर दिया है जिसे लेकर अब राजनीति के ही हार्डवेयर और साफ्टवेयर इंजीनियरिंग करने वाले इसे बदलापुर का बग वायरस करार दे रहे हैं।
कंप्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है। वर्ष 1998 में नरसिंहपुर के एक संत ने कंप्यूटर बाबा नाम दिया था, क्योंकि बाबा का दिमाग तेज चलता था। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में बाबा के कंप्यूटर मेंं राजनीति का वायरस आ गया था। भाजपा के शासनकाल में कंप्यूटर बाबा ने अपना अवैध साम्राज्य गोम्मटगिरी टेकरी के समीप बढ़ाया। तब उन पर शिकंजा नहीं कसा गया, लेकिन कंप्यूटर बाबा ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ देना शुरू कर दिया था।
सरकार के खिलाफ उन्होंने नर्मदा यात्रा निकालने का ऐलान कर दिया था, तब भाजपा सरकार ने उन्हें नदी न्यास का अध्यक्ष नियुक्त किया था, लेकिन चुनाव के पहले कंप्यूटर बाबा ने इस्तीफा देकर यात्रा निकाल ली और तब इंदौर में एक बड़ा आयोजन भी किया था। बाबा पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैंं। वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस का साथ देने के कारण वैसे ही कंप्यूटर बाबा पर सरकार की नजरे टेढ़ी थी। इस साल बाबा की जन्म कुंडली स्थानीय अफसरों ने तैयार कर ली थी।
कंप्यूटर बाबा ने 15 साल पहले जब टेकरी पर अतिक्रमण करना शुरू किया था, तब तत्कालीन कलेक्टर विवेक अग्रवाल से उनका विवाद हो गया था। कंप्यूटर बाबा ने तब राजवाड़ा पर धरना दिया था। उनके समर्थन में सैकड़ों साधु चौक पर ही धुनी रमाकर बैठ गए थे। तब अग्रवाल ने मंच पर आकर कंप्यूटर बाबा से माफी मांगी थी और बाबा ने धरना समाप्त किया था।

