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राजगढ़ में मोदी तो जबलपुर में शाह देंगे राहुल की रैली का जवाब

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भोपाल। मंदसौर गोलीकांड की पहली बरसी पर बुधवार को हुई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली ने भारतीय जनता पार्टी की चिंता और चुनौतियां बढ़ा दी हैं। चुनौती यह है कि किसानों की पीड़ा पर कैसे मरहम लगाया जाए, जबकि चिंता इस बात की है कि किसानों के हित में बेहिसाब काम करने के बाद भी उनका सरकार से मोहभंग क्यों हो रहा है। पार्टी का थिंक टैंक सोच रहा है कि कांग्रेस ने किसानों को संगठित कर भाजपा के खिलाफ खड़ा कर दिया तो मिशन 2018 में उसकी चुनौती बढ़ जाएंगी। बंटी हुई कांग्रेस जब मंदसौर में इतने किसानों को एकत्र कर सकती है तो बचे हुए वक्त में वह किसानों को सरकार के खिलाफ भी खड़ा कर सकती है।
कैसे दूर करें नाराजगी : भाजपा के नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल ये है कि किसानों की समस्याओं को कैसे दूर किया जाए। किसानों के मन में जो उपेक्षा का भाव घर कर गया है उसे कैसे दूर किया जाए। 15 साल से सत्ता संभाल रही भाजपा के पास वक्त भी कम है।

जवाब दे सकते हैं मोदी-शाह : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जून को मप्र दौरे पर आ रहे हैं। राजगढ़ के मोहनपुरा बांध सहित दो सिंचाई परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे। यहां वे आमसभा को संबोधित कर सकते हैं। उम्मीद है कि वे यहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोप का जवाब दे सकते हैं। उधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 12 जून को जबलपुर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि वे जबलपुर में कांग्रेस पर पलटवार करेंगे। भाजपा के मिशन 2019 के लिए किसान बड़ी चुनौती बने हुए हैं। केंद्र सरकार को इसका आभास भी है, यही वजह है कि मोदी कैबिनेट ने गन्ना उत्पादक किसानों के लिए भारी-भरकम पैकेज मंजूर किया है।

दो वजह से नाराजगी

एक तो सालभर में किसानों को 20 हजार करोड़ बांटने व तमाम घोषणाओं के बाद किसान कांग्रेस की सभा में पहुंचे यानी किसानों को कृषि विकास मॉडल एवं भावांतर जैसी योजनाएं रास नहीं आ रही हैं। दूसरी वजह- भाजपा सरकार के तीन कार्यकाल से जनता ऊब चुकी है अथवा किसानों में उपेक्षा का भाव घर कर गया है इसलिए वे स्वप्रेरणा से मंदसौर रैली में पहुंचे।

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