Site icon Yashbharat.com

राकेश सिंह की ताजपोशी के लिए खासतौर से चुना गया अक्षय तृतीया का दिन, जानिए क्या थी वजह

rakesh singh 1

भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा को नए अध्यक्ष मिल गए, जबलपुर से सांसद राकेश सिंह को नया अध्यक्ष बनाया गया है। उनकी ताजपोशी के लिए अक्षय तृतीया का दिन खासतौर से चुना गया था। प्रदेश प्रभारी रामपाल दिल्ली से बंद लिफाफा लेकर आए थे, जिसके खुलने का सभी इंतजार कर रहे थे।

दरअसल कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में शुरू किया गया कोई भी नया कार्य सफल होता है इस काम का कभी क्षय नही होता और वह अक्षय बना रहता है भाजपा आने वाले विधानसभा चुनावों को दृष्टिगत कोई भी काम शुरू करने से पहले तिथि और मुहूर्त का खास ध्यान रख रही है। सूत्रों के अनुसार इस बड़े फैसले पर भी मुहूर्त का खास ध्यान रखा गया। आज प्रदेश दफ्तर में ताजपोशी के वक्त इस बात का जिक्र पूर्व अध्यक्ष नन्दकुमार सिंह तथा सीएम शिवराज ने अपने उद्बोधन में किया। राकेश सिंह भी धार्मिक प्रवत्ति के हैं कल हरि झंडी मिलने के बाद उन्होंने भी कार्यभार ग्रहण करने के लिये आज के दिन की इक्छा जताई थी जिसके बाद आज उनकी ताजपोशी की गई।

उधर कल सांसद राकेश सिंह को नया भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सत्ता संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। पार्टी जो बी जिम्मेदारी देगी उसे निभाने का काम करूंगा। सिंह एक चैनल के सवालों का जवाब दे रहे थे।

जबलपुर सांसद राकेश सिंह मध्य प्रदेश बीजेपी के नए अध्यक्ष बना दिए गए हैं। वे नंदकुमार सिंह चौहान की जगह लेंगे। बुधवार को दोपहर में इसकी आधिकारिक घोषणा हो गई। राकेश सिंह को अध्यक्ष बनाकर चुनाव से पहले भाजपा में नई जान डालने की कोशिश की गई है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्र, भूपेंद्र सिंह के नाम भी चर्चाओं में थे।

 बाबूलाल गौर का बड़ा बयान

पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का बड़ा बयान आया है। पार्टी में अब तक वन मैन शो था, अब समन्वय से होगा काम। बीजेपी नए अध्यक्ष सत्ता के दबाव में काम नहीं करेंगे।

 नंदकुमार सिंह चौहान ने की थी पद छोड़ने की पेशकश
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार चौहान ने अपने इस्तीफे की पेशकश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से की थी। मुख्यमंत्री ने उनसे पद पर बने रहने को कहा, लेकिन नंदकुमार ने साफ कर दिया कि वह अपने संसदीय क्षेत्र में काम करना चाहते हैं।

माना जा रहा है कि नंदकमार चौहान का इस्तीफा मुख्यमंत्री को मिल गया है और उसे आज होने वाली कार्यसमिति की बैठक में रखा जाएगा। उसके बाद नए अध्यक्ष की घोषणा हो जाएगी। दिल्ली से रामपाल लिफाफे में नए अध्यक्ष का नाम तय करके लाए हैं।

संसदीय क्षेत्र में करेंगे काम

खरगोन में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अब अपने संसदीय क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। सीएम ने बताया कि नंदकुमार चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र में काम करने का आग्रह किया है, और उनके इस आग्रह पर विचार किया जाएगा।

पहले से चल रही है हटाए जाने की चर्चा
हालांकि ये पहली बार नहीं है, जबकि नंदकुमार सिंह चौहान को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की सरगर्मियां तेज हुई हों, लगभग दो महीने से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को बदले जाने की चर्चा जारी थी । माना जा रहा है कि पिछले दो चुनावों के सक्सेस रेट को देखते हुए 2018 में भी शिवराज सिंह और नरेन्द्र सिंह तोमर की जोड़ी चुनावी साल में पार्टी की स्टेयरिंग थाम सकती है।

अंदरूनी समस्याओं से निपटना बड़ी चुनौती
बीते दो सालों में भारतीय जनता पार्टी के लिए आने वाले चुनावों के लिए मुश्किलें बढ़ती ही आई हैं, मंदसौर आंदोलन, कर्ज़ माफी, फसलों का सही मूल्य ना मिलना, कमज़ोर कानून व्यवस्था और विधायकों से नाराज़गी जैसे मुद्दे पार्टी के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं। माना जा रहा है कि नंदकुमार सिंह ऐसी समस्याओं का समाधान नहीं निकाल पाएंगे, वहीं नरेन्द्र सिंह तोमर इस स्थिति के लिए बिल्कुल मुफीद मालूम होते हैं।

भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक सर्वे में भी ये बात सामने आ चुकी है, कि सही कैंडिडेट के साथ चुनाव न लड़ना पार्टी के भारी साबित हो सकती है, वहीं उपचुनाव के नतीजे भी भाजपा को खासा परेशान करने वाले साबित हुए हैं। इन तमाम परिस्थितियों को भले ही नंदकुमार सिंह हैंडल न कर पाएं, लेकिन नरेन्द्र सिंह तोमर संकटमोचक का काम जरूर कर सकते हैं।

 विवादित बयान और उपचुनाव में हार हो सकते हैं बदले जाने कारण
वैसे सूत्रों की मानें तो मध्य प्रदेश के कई बड़े नेता चाहते हैं कि पार्टी नंद कुमार सिंह चौहान की अगुवाई में ही चुनाव लड़े, लेकिन इस बात के आसार कम ही नज़र आते हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लेकर पिछले काफी समय से पार्टी में खींचतान चल रही है। नंद कुमार सिंह चौहान को बदलने की सुगबुगाहट इसलिए भी तेज हो गई थी  क्योंकि चौहान कई बार अपने विवादित बयानों से पार्टी की किरकिरी करवा चुके थे । इतना ही नहीं नंद कुमार सिंह चौहान के नेतृत्व में पार्टी पिछले उपचुनाव भी हार चुकी है।

Exit mobile version