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मध्‍य प्रदेश में अब तीन हजार वर्गफीट के मकान निर्माण की अनुमति दे सकेंगे आर्किटेक्ट

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भोपाल। शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को तीन हजार वर्गफीट के प्लॉट पर मकान बनाने के लिए अब नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के चक्कर नहीं लगाना पड़ेंगे। अब नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग में पंजीकृत आर्किटेक्ट ही अनुमति दे सकेंगे। राज्य शासन ने भूखंड पर भवन अनुमति जारी करने के नियमों में संशोधन कर दिया है।

अब तक आर्किटेक्ट डेढ़ हजार वर्गफीट के मकान की अनुमति दे सकते थे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने यह प्रस्ताव संचालक नगर एवं ग्राम निवेश को भेजा था। वहां से मंजूरी के बाद आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि भू-खंड या मकान बनाकर बेचने वाले कॉलोनाइजर को आर्किटेक्ट निर्माण अनुमति जारी नहीं कर सकेंगे। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि भवन निर्माण की अनुमति देने के अधिकार उसी आर्किटेक्ट को दिए जा सकेंगे, जो कम से कम 10 साल का अनुभव रखता हो और विभाग के अन्य मापदंडों का पालन करे।

 

सीबीडीटी की रिपोर्ट पर आरोप पत्र देने पर बनी सहमति

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की रिपोर्ट पर तीन आइपीएस सहित चार पुलिस अधिकारियों को आरोप पत्र देने पर सहमति बन गई है। आरोप पत्र के प्रारूप को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है। जल्द ही पुलिस अधिकारियों को आरोप पत्र दिए जा सकते हैं।

मालूम हो, कमल नाथ सरकार के दौरान पड़े आयकर छापों में चुनाव में कालेधन के उपयोग को लेकर सीबीडीटी ने राज्य शासन को रिपोर्ट भेजी है। इनमें चारों पुलिस अधिकारियों (आइपीएस सुशोवन बनर्जी, संजय माने, वी. मधुकुमार और राज्य पुलिस सेवा के अरुण मिश्रा) पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चुका है। सूत्रों का कहना है कि इन अधिकारियों को आरोप-पत्र देने के प्रारूप पर सरकार स्तर पर सहमति दी जा चुकी है। जल्द ही इस पर अमल किया जा सकता है।

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