मध्य प्रदेश में जिला सहकारी बैंक बंद करने की तैयारी

भोपाल । तेलंगाना, उत्तराखंड, केरल सहित अन्य राज्यों ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बंद कर दिए हैं। मध्यप्रदेश में भी इस दिशा में विचार शुरू हो गया है। सहकारिता विभाग ने इन राज्यों के मॉडल का अध्ययन करने के लिए तीन दल बनाए हैं, जो वहां जाकर वास्तविक स्थिति को देखेंगे। इसमें विभाग और अपेक्स बैंक के अधिकारियों के साथ सहकारिता से जुड़े नेताओं को शामिल किया गया है ताकि सभी पहलुओं को समझा जा सके।

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने भी खर्च घटाने के लिए द्विस्तरीय मॉडल पर विचार करने की सलाह दी है। माना जा रहा है कि प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण होने के बाद बीच की कड़ी (जिला बैंक) की आवश्यकता ही नहीं रह जाती है। यह काम प्रदेश स्तर से अपेक्स बैंक या विभाग द्वारा किया जा सकता है।

प्रदेश में किसानों को रबी और खरीफ फसलों के लिए अल्पकालीन कृषि ऋण प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के माध्यम से दिया जाता है। सवा चार हजार समितियों के 53 लाख से ज्यादा किसान सदस्य हैं। वहीं, 38 जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों की 839 शाखाएं हैं, जो समितियों को साख सुविधा उपलब्ध कराने के साथ बैंकिंग व्यवसाय भी करती हैं। इन सबके ऊपर नियंत्रण राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) रखता है। पिछले कार्यकाल में शिवराज सरकार सभी जिला बैंकों में कोर बैंकिंग व्यवस्था लागू कर चुकी है। अब समितियों का कंप्यूटरीकरण करने का निर्णय लिया गया है।

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