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मध्यप्रदेश के खुले में शौच से मुक्त की हकीकत यहां देखें

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भोपाल। देश भर में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्वच्छता के मामले में भले ही दूसरे पायदान पर हो, लेकिन जमीनी हकीकत की बात करें तो भोपाल में पीएम मोदी का स्वच्छ भारत अभियान फेल होता दिख रहा है.

खास बात यह है कि कुुु छ दिन पहले ही सीएम ने जानकारी दी थी कि प्रदेश के सभी नगर निगम खुले में शौच से मुक्त हो गये हैं पर इस दावे की हकीकत कुछ औऱ ही नज़र आ रही है। देखें तस्वीरे

निशातपुरा इलाके में आरपीएफ की चौकी में सालों से शौचालय नहीं है. रेलवे के अधिकारी अभियान को ठेंगा दिखा रहे हैं. पुलिस जवान आरोपियों को खुले में शौच कराने के लिए मजबूर हैं. शौचालय नहीं होने से चौकी स्टाफ को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
पुराने शहर के निशातपुरा में आरपीएफ की 18 साल पुरानी चौकी है. चौकी पर सब इंस्पेक्टर समेत 12 जवान की तैनाती है. आरपीएफ का चौकी स्टाफ रेलवे के सामान और रेलवे यार्ड की सुरक्षा करता है. साथ ही रेलवे का सामान चोरी करने वाले अपराधियों की धरपकड़ भी की जाती है. ऐसे में आरपीएफ चौकी के लिए सबसे बड़ी शर्मनाक बात यह है कि सालों से रेलवे ने चौकी में शौचालय का निर्माण नहीं कराया.

आलम यह है कि पकड़े गए अपराधियों को रस्सी से बांधकर उन्हें चौकी के सामने ही खुले में शौच कराया जाता है. शौच के दौरान रस्सी का दूसरा हिस्सा पकड़कर आरपीएफ के जवान पहरा देते हैं.

 इतना ही नहीं शौचालय नहीं होने के कारण आरपीएफ स्टाफ को भी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.

वैसे तो रोजाना अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, लेकिन जब आरोपियों को पकड़ा जाता है, तब शौचालय नहीं होने की कमी खलती है. चौकी में अपराधियों को रातभर रोकना भारी पड़ता है. शौचालय नहीं होने के कारण स्टाफ की कोशिश रहती है कि सभी आरोपियों को भोपाल रेलवे स्टेशन पर बने आरपीएफ थाने में शिफ्ट किया जाए, लेकिन देर शाम पकड़े गए आरोपियों को थाने ले जाना भी कभी-कभी संभव नहीं रहता.

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