मध्यप्रदेश की मतदाता सूची चुनाव आयोग के निशाने पर

जबलपुर। मध्यप्रदेश की मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और दो जगह नाम लिखे मतदाताओं की बड़ी तादाद को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत के दौरे के बाद आयोग के अधिकारी अब प्रदेश में दौरा करेंगे।

इस कड़ी में चुनाव आयोग के अधिकारी संदीप सक्सेना एक मई को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में बैठक करेंगे।
इस दौरान निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। उल्लेखनीय है कि ईआरओ नेट को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त की बैठक में भी सवाल उठ चुके हैं। उधर, मतदाता सूची को दुरुस्त करने की मुहिम मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने छेड़ दी है।

इसके मद्देनजर कराए गए विशेष पुनरीक्षण में अप्रैल के पहले पखवाड़े तक साढ़े आठ लाख से ज्यादा ऐसे मतदाता चिन्हित किए गए हैं, जिनका निधन हो चुका है या फिर अनुपस्थित, स्थानांतरित या दो जगह नाम होने की श्रेणी में शामिल हैं। इनके नाम हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव आयोग इतने से ही संतुष्ट नहीं है।

ईआरओ नेट से मतदाता सूची का काम करने में हो रही दिक्कतों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने मौजूदा सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने का काम किया है। इसको लेकर आयोग वीडियो कॉन्फ्रेंस कर चुका है।

साथ ही काम को और पुख्ता करके मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने आयोग ने खुद निगरानी का फैसला किया है।
मतदाता सूची में 2.89 लाख मृत मतदाता
प्रदेश की मतदाता सूची में 13 अप्रैल की स्थिति में 2 लाख 89 हजार मृत मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। इनके नाम परिजनों से पुष्टि और पंचनामा बनाकर हटाए जाएंगे। इसके साथ ही 3 लाख 55 हजार 120 स्थानांतरित और 94 हजार 439 अनुपस्थित मतदाताओं की पड़ताल करके निर्णय लिया जाएगा। 1 लाख 18 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम एक से ज्यादा स्थान पर दर्ज हैं। इनके नाम एक स्थान पर रखने के लिए बीएलओ घर-घर जाकर सर्वे सितंबर में करेंगे।
यहां हो रही दिक्कत
प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा दिक्कत बाहर से आये लोगों के कारण हो रही है रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचलों में शहर की ओर लोग आ रहे है जिनका नाम पहले से उनकी स्थानीय मतदाता सूची में जुड़ा हुआ है और उन्होनें यहां आकर भी मतदाता सूची में जुड़वा लिया है जिससे एक ही नाम दो जगह जुड़ गये है। इसके अलावा ऐसे बहुत से लोग है जो अपना नाम शहर में नहीं जुड़वाना चाहते और फिर सर्वे के दौरान यह बात आती है कि बड़ी संख्या में लोगों के नाम जुड़ने से रह गये है जबकि उनका नाम पहले से जुड़ा हुआ है।

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