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भारत तीसरे चरण में पहुंचा तो हालात संभालना होगा मुश्किल

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नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा देश के लॉकडाउन करने का कदम स्वास्थ्य मंत्रालय, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह पर उठाया गया। देश को कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाने का यही एकमात्र रास्ता था। 21 दिन समयावधि के पीछे भी वैज्ञानिक आधार है। दरअसल ज्यादातर वायरस का जीवन चक्र होता है। फ्लू जब फैलता है तो उससे किसी की जान नहीं जाती। यदि दवा ली है तो 7 दिन में ठीक होगा और नहीं ली तो भी एक सप्ताह में ठीक हो जाएगा। यह इसलिए कि वायरस का जीवन चक्र खुद-ब-खुद एक सप्ताह में शरीर छोड़ देगा। मल्टीप्लीकेशन के लिए उसे बाहरी वातावरण में यदि उपयुक्त परिस्थितियां नहीं मिली तो वह खत्म हो जाएगा।

कोविड-19 नया वायरस है इसलिए अभी इसके बारे में पुख्ता रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता कि ये हमारी प्रतिरोधक क्षमता के अनुसार खुद में क्षमता विकसित कर लेगा। लेकिन अब तक जो भी शोध प्रकाशित हुए हैं या मेरे बीते तीन दशकों के वायरस पर काम करते  हुए जो अनुभव है उसे पता लगता है कि इसकी संभावना बहुत कम है। प्रश्न यह है कि लॉकडाउन इस वायरस से दो-दो हाथ करने में कैसे मददगार होगा। दरअसल फिजिकल डिस्टैंसिंग संक्रमण को एक व्यक्ति से दूसरे में जाने से रोकने का काम करेगी। तीसरा चरण काफी खतरनाक हो सकता है। चीन, अमेरिका और यूरोप के कई देश इसी चरण से जूझ रहे हैं। समय रहते सरकार ने सख्त कदम उठाकर देश को तीसरे चरण में जाने से बचा लिया है।

यदि हम तीसरे चरण में (पांचवें सप्ताह में सामान्यतौर पर पहुंच जाना चाहिए था) पहुंचे होते तो संक्रमित लोगों की संख्या 10 गुना से अधिक हो चुकी होती जबकि अभी तक संक्रमित लोगों की संख्या में दो गुना से कुछ अधिक का ही इजाफा हुआ है। यही लॉकडाउन का सबसे बड़ा फायदा हुआ है। 21 दिन के लॉकडाउन समयसीमा इसलिए तय की गई कि जो व्यक्ति संक्रमित हो गया है वह 14 दिनों में संक्रमण से मुक्तहो जाएगा, वहीं जो लोग संक्रमित लोगों से एक्सपोज हुए होंगे उनमें भी 7 दिनों में लक्षण उभर आएंगे । यानी 14 और 7 दिन अर्थात 21 दिनों में यह साफ हो जाएगा कि कितने लोग संक्रमित हैं।
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