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भारत के चीफ जस्टिस बोले-पूर्वाग्रह न्यायिक प्रक्रिया के लिए घातक

जबलपुर। भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि किसी भी तरह का पूर्वाग्रह न्यायिक प्रक्रिया के लिए घातक है। प्रत्येक न्यायाधीश को तार्किकता और वास्तविकता के जरिए किसी नतीजे पर पहुंचना चाहिए। वे हाईकोर्ट के साउथ ब्लॉक सभागार में हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार और सीनियर एडवोकेट्स कौंसिल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह में बोल रहे थे।

स्टेट लॉयर्स एकेडमी खुलनी चाहिए

सीजेआई ने कहा कि भूमंडलीकरण के इस युग में कानूनी क्षेत्र में भी निरंतर परिवर्तन सामने आ रहे हैं। ऐसे में वकीलों और न्यायाधीशों को खुद को अपडेट रखना आवश्यक है। वकीलों की ट्रेनिंग के लिए स्टेट लॉयर्स एकेडमी वक्त का तकाजा है। मुख्यपीठ जबलपुर में मुख्यालय के साथ-साथ खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में भी इसकी शाखाएं होनी चाहिए। इससे वकीलों का बेहतर प्रशिक्षण मुमकिन होगा।
सीजेआई ने कहा कि भगवान ने हमें सब कुछ दिया। लेकिन एक चीज ऐसी है जिसे नहीं दी वह हमने खुद विकसित किया है वह है हमारा अहंकार। इसलिए इसे भगवान को अर्पित कर देना चाहिए।

संस्कारधानी से गहरा जुड़ाव

उन्होंने कहा कि मैं पहली बार 1 मार्च 1997 को जबलपुर आया। उस दिन मैं पहली बार नर्मदा दर्शन करने गया। उसी क्षण से ह्दय में नर्मदा और संस्कारधानी से गहरे जुड़ाव का संकल्प उत्पन्न् हो गया, जो आज भी है।

बुरे अनुभव भूलने का उपहार

सीजेआई ने विनोदप्रिय लहजे में कहा कि आज मुझे सुबह से फूलों के उपहार मिल रहे हैं। दरसअल, फूल सुगंध देते हैं और सुगंध नकारात्मकता की दुर्गंध से मुक्ति का सबसे बेहतरीन उपाय होते हैं। इन गुलदस्तों से मुझे बुरे अनुभवों की विस्मृति का संबल मिला है।

प्रतिबद्धता की मिसाल हैं सीजेआई 

एमपी हाईकोर्ट के सीजे हेमंत गुप्ता ने सीजेआई के सम्मान में कहा कि वे वाकई प्रतिबद्धता की मिसाल हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि एयर इंडिया की उड़ान निरस्त होने के बावजूद वे अपना वादा निभाते हुए पूरी रात ट्रेन का सफर तय करके जबलपुर पहुंचे हैं। वस्तुत: यही प्रतिबद्धता उनकी सफलता का राज है। भले ही सीजेआई की जन्मभूमि ओडिशा हो, लेकिन कर्मभूमि जबलपुर के प्रति उनका लगाव गौरव का विषय है। कानून के समतुल्य लिट्रेचर, आर्ट और कल्चर के नॉलेज के मामले में सीजेआई का कोई सानी नहीं है।

ये रहे उपस्थित

पटना हाईकोर्ट के सीजे राजेन्द्र मेनन, मप्र हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश संजय सेठ, महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव, हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार अध्यक्ष मनोज शर्मा और सीनियर एडवोकेट्स कौंसिल के अध्यक्ष राजेन्द्र तिवारी मंचासीन रहे।

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