वेब डेस्क। उत्तरी थाईलैंड की थाम लुआंग गुफा में फंसे 12 फुटबॉल खिलाड़ियों और उनके कोच इकापोल चांथावोंग को मंगलवार को गुफा से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. तीन दिनों तक चले इस खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई थी. बता दें कि इस अभियान के दौरान एक गोताखोर की मौत भी हो गई.
अंधेरी, पानी से भरी गुफा में 18 दिन तक इन बच्चों का मनोबल बनाए रखने और उन्हें जीवित रखने की वजह से पूरी दुनिया में इस 25 वर्षीय कोच की सराहना हो रही है. इन मुश्किल दिनों में जो एक कला उनके काम आई वह है- मेडिटेशन यानी ध्यान लगाना.
इस दौरान वह खुद भी ध्यान लगाते और अपने स्टूडेंट्स को भी इसके लिए प्रेरित करते. वाइल्ड बोर्स फुटबॉल टीम का कोच बनने से पहले इकापोल करीब एक दशक तक बौद्ध भिक्षु रह चुके हैं. वह अब भी अक्सर मंदिर में रहते हैं और वहां अन्य भिक्षुओं के साथ ध्यान लगाते हैं.
इकापोल की आंटी थाम चांथावोंग कहती हैं, “वह एक घंटे तक ध्यान लगा सकता है. इससे जाहिर है कि उसे और उन लड़कों को अपना दिमाग शांत रखने में मदद मिली होगी.”
इकापोल और लड़कों के गुफा में फंसने के करीब 15 दिन बाद रविवार को रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ. इसमें पहले और दूसरे दिन 4-4 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और तीसरे दिन यानी मंगलवार को चार लड़कों के बाद इकापोल को सबसे आखिर में गुफा से बाहर निकाला गया.
13 लोगों का यह ग्रुप 23 जून से लापता था. इस ग्रुप में इकापोल एकमात्र वयस्क हैं, उनके अलावा 11 से 16 की उम्र के 12 लड़के शामिल हैं. बाद में लड़कों की साइकिल गुफा के बाहर मिली, इससे अंदाजा लगाया गया कि वे सभी गुफा के अंदर हो सकते हैं.
इन लोगों को 2 जुलाई को गुफा के अंदर खोजा गया था. इससे पहले नौ दिनों तक इकापोल ने पानी से भरी, अंधेरी-खतरनाक गुफा में न सिर्फ सभी बच्चों को जीवित रखा बल्कि उनका मनोबल भी बनाए रखा. उन्होंने अपने हिस्से का खाना भी लड़कों में बांट दिया था. इस बात को लेकर उनकी खासी तारीफ भी हो रही है. हालांकि कुछ लोग इस बात को लेकर उनकी आलोचना भी कर रहे हैं कि उन्होंने बारिश के मौसम में बच्चों को लेकर गुफा के अंदर जाने पर हामी क्यों भरी?
इसके लिए वह खुद को दुर्भाग्यशाली मानते हैं. वह बच्चों को इसलिए बाहर लेकर गए क्योंकि 23 जून की सुबह उनके हेड कोच की एक अपॉइंमेंट थी. इसी दिन यह सभी फंस गए थे.
उन्हें छोटे लड़कों को दोई नांग गैर पर्वत श्रृंखला से घिरे एक फुटबॉल मैदान में ले जाना था, जो कई झरनों और गुफाओं की जगह है और थाई-म्यांमार सीमा से घिरा हुआ था. समूह का ख्याल रखने का निर्देश उन्हें ही दिया गया था. हेड कोच ने एक सलाह देते हुए कहा था, ‘जब आप सफर कर रहे हों तो यह ध्यान रखें कि साइकिल उनके पीछे ही चलाएं ताकि आप पर नजर रखी जा सके.’ थाईलैंड की इस घटना ने सभी का ध्यान खींचा. ऑस्ट्रेलिया और फिनलैंड तक से मदद आई. अमेरिकी सरकार से भी इन बच्चों के लिए मदद मिली.
गुफा में फंसे एक बच्चे की मां ने कहा कहा वह कभी इकापोल पर आरोप नहीं लगाएंगी. उन्होंने कहा ‘अगर इकापोल साथ नहीं गए होते तो मेरे बच्चे के साथ क्या होता? मैं उन पर कभी आरोप नहीं लगाउंगी.’
इकापोल के साथ कॉफी स्टैंड पर काम करने वाले उनके दोस्त जॉय ने बताया कि उन्होंने 10 साल की उम्र में अपने परिजन खो दिए थे. इसके बाद इकापोल ने बौद्ध भिक्षु की शिक्षा ग्रहण की हालांकि अपनी दादी की देखभाल के लिए उन्होंने मॉनेस्ट्री छोड़ दिया. जॉय ने कहा कि वह खुद से ज्यादा टीम के बच्चों को प्यार करते हैं.
जॉय ने कहा, इकापोल ना तो शराब पीते हैं, ना ही धूम्रपान करते हैं. शनिवार को थाई नेवी ने इकापोल की ओर से लिखी एक चिट्ठी की तस्वीर जारी की थी. इसमें उन्होंने सभी बच्चों के परिजनों से माफी मांगी थी. इकापोल ने लिखा था, ‘मैं बच्चों की देखभाल करने का वादा करता हूं. मैं आप सभी के समर्थन के लिए शुक्रिया अदा करता हूं और मैं माफी मांगना चाहता हूं.’
