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बैंकों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहा नगर निगम मुख्यमंत्री स्व निधि योजना को क्रियान्वित करने प्रदेश में 16 वे नंबर पर

Sbi bank

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जबलपुर, अमित झा। गरीबों के अरमानों पर बैंकर्स द्वारा पानी फेर दिया गया। होली में व्यापार करने के लिए सरकारी सहायता की आस में बैठे लोगों को बैंकों ने इतने चक्कर लगवा दिए कि अब वे योजनाओं का लाभ लेने से भी डर रहे हैं। बैंक कर्मियों की लापरवाही का खामियाजा नगर निगम को भी भोगना पड़ा जो योजना में चल रही प्रतिस्पर्धा में प्रदेश में सबसे आखरी नंबर यानी 16 वे नंबर पर आ गया।

दरअसल न पूरा मामला यह है कि मुख्यमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत रेवड़ी और ठेला लगाकर व्यापार करने वाले हितग्राहियों को 10 हजार की राशि लोन के रूप में दी जानी थी मगर शहर की बड़े बैंकों ने इन्हें इतने चक्कर लगवाए कि उन्होंने योजना का लाभ लेने का इरादा भी छोड़ दिया। वहीं नगर निगम के अधिकारियों की इन बैंकों ने मेहनत पर भी पानी फेर दिया।

35 हजार में 18,444 ही स्वीकृत
नगर निगम द्वारा मुख्यमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत 35 हजार हितग्राहियों को 10 हजार रुपयों का लोन स्वीकृत किया गया था। लेकिन बैंकों द्वारा अभी तक मात्र 18,444 लोन ही स्वीकृत किए गए। जिसके कारण प्रदेश में योजना को शत प्रतिशत पूरि करने के कारण इंदौर नगर निगम पहले नम्बर पर आ गया वही जबलपुर नगर निगम 16वे नम्बर पर है।

 

इस पूरे मामले में बैंककर्मियों की लापरवाही उजागर होती है जिसमें बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंक शामिल है जिन्होंने किसी न किसी बहाने से इन हितग्राहियों के लोन को अटका कर रखा। वही नगर निगम अधिकारियों के अथक प्रयास के बावजूद भी लोन को सैंक्शन नहीं किया।

इन पर इतनी है पेंडेंसी
मुख्यमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत लोन वितरण करने वाले बैंकों की पेंडेंसी कुछ इस तरह है। बैंक ऑफ इंडिया 486, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 539, इंडियन बैंक 523, आरआरबी मध्य प्रदेश 973, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 2930, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 1073, बैंक ऑफ महाराष्ट्र 103 केनरा बैंक 112 ।

हमने अपनी भरसक कोशिश की है, लेकिन बैंक कर्मियों की लापरवाही का खामियाजा योजना से जुड़े हितग्राहियों को भोगना पड़ रहा है। लगातार हितग्राहियों को बैंक चक्कर लगवा रहे हैं जिस कारण अभी तक 35 हजार में मात्र 18 हजार हितग्राहियों को ही योजना का लाभ मिल पाया है। जिस कारण हम योजना में प्रदेश में 16 नंबर पर हैं।
अंजू सिंह, सहायक आयुक्त नगर निगम

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