बरही। बांधवगढ टाइगर रिज़र्व अंतर्गत ताला जोन [caption id="attachment_23082" align="aligncenter" width="300"] फाइल फोटो[/caption] के समीप 11 वर्षीय राजबहरा बाघिन का शव मिला है। पार्क की माने तो राजबहरा की मौत टाइगर्स की आपसी फाइटिंग की वजह से हुई है। जानकारी के बाद मौके पर पहुंच पार्क प्रबन्धन ने आवश्यक कार्यवाही कर पीएम आदि की कार्यवाही पूरी की है,बताया जाता है कि मृत बाघिन के गले मे गम्भीर घाव के निशान है,साथ ही बाघिन के मल द्वार में भी गम्भीर जख्म बताये जा रहे है। सूत्रों की माने तो जिस क्षेत्र में बाघिन का शव प्रबन्धन को मिला है,उस वन क्षेत्र में बाघ टी 37,टी 39,टी 09 एवम बाघिन टी 42 की लम्बे समय से मूवमेंट देखी जा रही थी,कयास ये लगाए जा रहे है कि इन्ही बाघों की राजबहरा बाघिन से फाइट हुई होगी,जिसके बाद बाघिन की असामयिक मौत हुई है,जानकारों की माने तो बाघों की नेचुरल डेथ अमूमन 13 से 14 वर्ष के बीच होती है,माना जा रहा है कि मृत राजबहरा बाघिन अपने जीवन के 2 वर्ष पूर्व ही बाघों से हुई लम्बी फाइट में गम्भीर रूप से घायल होकर काल के गाल में समा गई। एक दिन पहले हुवा था उपचार सूत्रों की माने तो कई दिनों से ताला जोन के राजबहरा क्षेत्र में बाघों की फाइटिंग का सिलसिला चल रहा था,इसकी जानकारी भी प्रबन्धन को थी।गुरुवार को फाइटिंग के दौरान घायल हुए राजबहरा बाघिन( टी 34) के घायल होने की जानकारी पर प्रबन्धन ने सम्बन्धित चिकित्सक नितिन गुप्ता से उपचार भी कराया था,बताया जाता है कि गुरुवार की दोपहर 2 बजे मृत बाघिन टी 34 को डॉट आदि देकर कब्जे में लिया गया था,जिसके बाद उपचार आदि कर पैनकीलर दिया गया था।जिसके बाद शुक्रवार की सुबह उसे बांधवगढ स्थित ताला जोन के बठान वन क्षेत्र में मृत पाया गया है। आधिकारिक रूप से प्रबन्धन बाघिन की मौत को टाइगर्स की आपसी फाइट का नतीजा मान रही है,वही जानकारों की माने तो घायल वृद्ध बाघिन युवा बाघों की फाइट के बाद ज्यादा गम्भीर थी, उसे कब्जे में रखकर आवश्यक उपचार किया जाना था, न कि उपचार की ओपचारिक खाना पूर्ति कर उसे फिर से वन क्षेत्र में विचरण के लिए छोड़ देना था। बाघिन के मौत के क्या कारण है,वो तो पीएम रिपोर्ट के बाद ही सामने आयेगा, पर इतना कहना अतिशयोक्ति नही होगी कि लगातार असामयिक बाघों की हो रही मौतो से प्रबन्धन क्यों नही सबक ले रहा है।