बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने तीन राज्यों में उम्रकैद की सजा पाए कैदियों की समय पूर्व रिहाई के लिए कदम उठाने के दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उम्रकैद की सजा पाए लोगो कैदियों के समय पूर्व रिहा करने को लेकर कदम उठाने का निर्देश दिया है। जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन तीनों राज्यों को राष्ट्रीय विधिक सेवा अथॉरिटी(नालसा) द्वारा दी गई सिफारिशों के आधार पर उम्रकैद की सजा पाए कैदियों को समय पूर्व रिहा करने की कवायद शुरू करने का आदेश दिया है।
इसके तहत उन कैदियों की रिहाई के लिए प्रयास किए जाएंगे जो 14 वर्ष जेल की सजा काट चुके हैं। नालसा ने समय पूर्व रिहाई वाले आवेदनों के निपटारे के लिए समय निर्धारित करने की सिफारिश की है। नालसा के मुताबिक, 21 राज्यों में करीब 1650 कैदियों के आवेदन लंबित हैं। जबकि 439 ऐसे कैदी हैं जिन्होंने 14 वर्ष कैद की सजा करने के बाद भी समय पूर्व रिहाई के लिए आवेदन दाखिल नहीं किया है।
कानून के मुताबिक, उम्रकैद की सजा का मतलब अंतिम सांस तक कैद है। हालांकि कानून के तहत राज्य सरकार व जेल ऑथोरिटी को यह अधिकार है कि वह उन कैदियों को 14 वर्ष बाद रिहा करने पर विचार कर सकता है अगर सजा के दौरान उसकाआचरण अच्छा रहा हो।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि लीगल एड वाले वकील 14 वर्ष की कैद की सजा काट चुके दोषियों की तरफ से अपील दायर करते है जबकि उनकी कोशिश होनी चाहिए कि वे वैसे कैदियों को समय पूर्व रिहाई के लिए ऑथोटीटी के समक्ष आवेदन करें।