ग्वालियर। हाई कोर्ट की युगल पीठ से नायब तहसीलदार के पदों को भरने के लिए कराई जा रही विभागीय परीक्षा में पटवारियों को बड़ी राहत मिल गई है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा है कि प्रशिक्षण समय को अनुभव में जोड़ा जाए। इस फैसले से करीब 1600 पटवारी परीक्षा फॉर्म भर सकेंगे।
नायब तहसीलदार के 169 पद विभागीय परीक्षा के माध्यम से भरे जाने हैं। इसके लिए विज्ञापन भी जारी किया गया। इस परीक्षा में 5 साल का अनुभव रखने वाले पटवारी ही शामिल हो सकेंगे, लेकिन प्रशिक्षण समय को अनुभव में नहीं जोड़ा जा रहा था, जिसके चलते बड़ी संख्या में पटवारी विभागीय परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो गए थे। इसको लेकर प्रिंसी गुप्ता व रोहित सिंह अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी, अनमोल खेड़कर ने तर्क दिया कि नियुक्ति के बाद ही प्रशिक्षण पर भेजा जाता है। प्रशिक्षण में राजस्व संबंधी कार्य सीखे जाते हैं। इस दौरान भी काम करते हैं। यह नौकरी का हिस्सा है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश पारित कर दिया। प्रशिक्षण के समय को अनुभव में जोड़ा जाए।
वर्ष 2013 में शासन ने पटवारी परीक्षा का आयोजन किया था। 4600 पद भरे गए थे। ट्रेनिंग कराने के बाद 3000 पटवारी को नियुक्ति दे दी, लेकिन 1600 पटवारियों को 2 महीने बाद नियुक्ति दी थी। विभागीय परीक्षा में 1600 पटवारी शामिल नहीं हो पा रहे थे। इनके प्रशिक्षण समय को अनुभव में नहीं जोड़ रहे थे।

