11 दिन का एक एक पल जन्म-मृत्यु जैसा
जबलपुर। नींद गायब है। शरीर जब जवाब देता है तब थोड़ी निद्रा लेकर अपनी जीत सुनिश्चित करने मतदाताओं तक पहुंचना शुरू कर देता है। चुनाव को त्यौहार मानकर चलने वाले लोगों की पौ बारह है। प्रत्याशियों को अपनी अपेक्षा बताकर जेब गरम करने कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। प्रस्तुतिकरण ऐसा मजबूत बताया जाता है कि प्रत्याशियों की जेब ढीली ही हो जाती है।प्रत्याशियों के रिश्तेदार और नातेदार जब इस समय चुनाव मैदान में कूदे हैं। और बचे 11 दिन के एक एक पल मतदाता तक अपनी बात रखने का कोई भी मौका नहीं गंवा रहे हैं।
प्रत्याशी की नींद गायब, उनकी पौ बारह, अपनी तो हालत पतली

