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पॉक्सो एक्ट में अवयस्क को भी सजा का प्रावधान

consumer court

अहमदाबाद। सौराष्ट्र गुजरात में एक स्कूली छात्रा को बहला फुसलाकर साथ में भगा ले जाकर दूष्कर्म करने के मामले में हाईकोर्ट ने प्रोटेक्शन आॅफ चिल्ड्रन्स फ्रोम सेक्सुअल आॅफेंस पॉस्को के तहत आरोपी की सजा बढाकर 10 साल करते हुए केन्द्र व राज्य सरकारों से कहा है कि स्कूल कॉलेज में पढने वाले बच्चों को इस कानून से अवगत कराएं। निचली अदालत ने इस प्रकरण में 7 साल की सजा दी थी।

देवभूमि द्वारका के खंभालिया में 22 मार्च 2014 को 19 साल के अशोक भाई 16 साल की स्कूली छात्रा को स्कूल से भगा ले गया था। अशोक ने किशोरी को कई जगह घुमाता रहा तथा उसके साथ कई बार दुुष्कर्म भी किया।

पीडिता के पिता ने अशोकके खिलाफ दूष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई जिस पर सुनवाई के बाद निचली अदालत ने उसे 7 साल की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट न्यायाधीश एम आर शाह व न्यायाधीश अल्पेश कोग्जे की खंडपीठ ने इस मामले में सरकार की सजा बढाने की अपील पर सुनवाई की। अतिरिक्त महाधिवक्ता जानी ने अदालत में कहा कि सोशल मीडिया के चलते आजकल बच्चे जल्द संपर्क में आ जाते हैं तथा गंभीर प्रकार का अपराध कर बैठते हैं उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सरकारी वकील मीतेश अमीन ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 के तहत सजा की मांग की। इस पर अदालत ने सजा को बढाकर 10 साल कर दिया।

गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश की खंडपीठ ने बच्चों को यौन अपराध से सुरक्षा प्रदान कराने के लिए बनाए गए पॉक्सो एकट को लेकर एक दिशा निर्देश जारी करते हुए केन्द्र व राज्य सरकारों से कहा है कि स्कूल, कॉलेज व

समाज में बच्चों तक इस बात की जागरुकता फैलाई जानी चाहिए कि प्रोटेक्शन आॅफ चिल्ड्रन्स फ्रोम सेक्सुअल आॅफेंस पॉस्को के तहत अवयस्क को भी 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

बच्चों को किसी भी तरह का अपराध करने से पहले सोचना चाहिए कि उनकी एक गलती उनका जीवन या एक दशक बर्बाद कर सकती है। अदालत ने पुलिस, शिक्षा विभाग व संबंधित संस्थाओं को भी इस पर जागरुकता लाने के निर्देश दिए।

संबंधित संस्थाओं को निर्देश दिया है कि दसवीं बारहवीं में पढने वाले बच्चे अनजाने में कानून का उललंघन करते हैं जिससे उन्हें रोकना चाहिए, पॉक्सो एक्ट की इस जानकारी को प्रचार माध्यमों के जरिए समाज व खासकर बच्चों तक पहुंचाई जानी चाहिए, कि छोटे बच्चों को भी सजा का प्रावधान है।

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