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पेंशन पर पहला हक कर्मचारियों का

आंध्र की पूर्व विधायक ने त्यागी पेंशन
जबलपुर, विशेष प्रतिनिधि। राष्ट्रीय पेंशन नीति का राष्ट्रीय स्तर पर विरोध कर रहे कर्मचारियों को उस समय सुखद आश्चर्य हुआ जब आंध्र प्रदेश की पूर्व विधायक एन .शेषाद्रि ने उन्हें मिलने वाली अपनी 2 पेंशनों को सरकार को यह कहते हुए लौटा दी कि कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाल की जाए ।पेंशन पाने का पहला हक कर्मचारियों का है ।जो नौकरी में आने के बाद पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहता है ,और वह अलग से आय कमाने का अन्य स्रोत नहीं अपना सकता है ।लिहाजा पहले उन्हें इसका हक मिले। ताकि वह बुढ़ापे की जिंदगी गुजारने मैं सुरक्षा महसूस कर सकें। जानकारी के अनुसार आंध्र प्रदेश की पूर्व विधान परिषद एवं विधायक रही काकीनाडा की एन.शेषाद्रि ने आंध्र प्रदेश विधानसभा सचिव को पत्र लिखकर कहा कि हुई नई पेंशन नीति के विरोध में और कर्मचारियों को पेंशन अधिनियम 1972 लागू एवं पुन: बहाल करने की भावना से मिलने वाली दोनों पेंशन को त्याग कर रही है ।ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस एन पाठक ने आंध्र प्रदेश की पूर्व विधायक के इस कदम की सराहना करते हुए इसे आदर्श बताया है। श्री पाठक ने केंद्र एवं राज्य सरकारें से पुरानी पेंशन बहालीऔर नई राष्ट्रीय पेंशन नीति को रद्द करें। उन्होंने कहा कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने भी नई पैशन को खारिज कर पुरानी पेंशन बहाली का संकल्प सदन में पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है ।आंध्र की पूर्व विधायक एवं विधान परिषद सदस्य एन. शेषाद्रि के इस कदम पर कर्मचारी संगठनों जीसीएफ मजदूर संघ के मिठाई लाल रजक, व्हीकल फैक्ट्री मजदूर यूनियन के नितिन चाकर, खमरिया लेबर यूनियन के अरनव दास गुप्ता जीआईएफ मजदूर यूनियन के मनोज साहू के साथ अन्य श्रमिक नेता अजय चौहान, एन के कोचर ,अशोक तिवारी ,मनमोहन खुल्बे, पीके तिवारी आदि ने इसे पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन की प्रगति का द्योतक बताया है।

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