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पूर्व PM मनमोहन सिंह ने CJI महाभियोग प्रस्ताव पर नहीं किया हस्ताक्षर, फिर क्या कहा..

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इंटरनेट डेस्कः पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सी.जे.आई.) दीपक मिश्रा के खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग चलाने के प्रस्ताव को तारपीडो कर दिया है। मनमोहन सिंह ने मौजूदा सी.जी.आई. के खिलाफ महाभियोग चलाने के विचार का विरोध किया क्योंकि यह न तो देश की संस्कृति है और न ही यह उचित है। यह प्रस्ताव पिछले सोमवार को पेश किया जाना था मगर विपक्षी पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं की निर्धारित बैठक को स्थगित कर दिया गया। ऐसा इसलिए हुआ कि एक नेता को राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनमोहन सिंह के हस्ताक्षर प्राप्त करने के लिए तैनात किया गया था। उस सदस्य को उस समय आघात पहुंचा जब पूर्व प्रधानमंत्री ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया।

बताया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने उस सदस्य को बताया कि यह सब अच्छा नहीं। इससे न तो कांग्रेस को मदद मिलेगी और न ही विपक्ष या देश को। जब डा. मनमोहन सिंह के विचारों से पार्टी को अवगत करवाया गया तो पार्टी में हड़कम्प मच गया। यद्यपि मनमोहन सिंह के पास कोई पद नहीं मगर उन्होंने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर यह संकेत दिया कि पार्टी को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

पी. चिदम्बरम और डा. अभिषेक मनु सिंघवी व कुछ अन्य सदस्यों ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया और प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। यद्यपि एक अन्य वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल इस प्रस्ताव को आगे ले जाने में अग्रिम थे। प्रस्ताव के खिलाफ असंतोष की आवाज उठने के बाद प्रस्ताव को लाने वाले ‘बैक सीट’ पर चले गए।

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