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पीठ पर बैग लटकाए कोर्ट पहुंचा बच्चा, जज ने बरी तो किया ही ट्यूशन फीस देने का भी लिया फैसला

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बिहारशरीफ: नालंदा में गुरुवार को अजब नजारा दिखा। जिला किशोर न्याय परिषद में मारपीट के मामले में आरोपित 16 वर्षीय 9वीं कक्षा का छात्र अपनी पीठ पर स्कूल बैग लादकर किशोर न्याय परिषद में लंबित मुकदमे की सुनवाई में भाग लेने पहुंच गया। किशोर को देख जज भी दंग रह गए। प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्रा ने किशोर के मुकदमे के साथ कार्यकलाप व परिवार की आर्थिक स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद प्रधान दंडाधिकारी ने द्रवित होकर उसके खिलाफ लंबित मुकदमे को बंद करने का फैसला लिया। साथ ही जज ने कहा कि वे खुद उसकी विज्ञान और अंग्रेजी विषय की कोचिंग की फीस देंगे।

केवल बचाव के लिए गया था

कई जगह से फटे कपड़े पहनकर कोर्ट पहुंचे बच्चे ने अपनी सफाई में बताया कि 20 फरवारी 2020 को हुई घटना में परिवार के लोगों का पड़ोसियों से झगड़ा हुआ था, वह मारपीट में शामिल नहीं था, बस बचाव करने गया था। दो पक्षों में मामूली बात को लेकर गाली-गलौज व मारपीट हुई थी। जिसमें उसके भाई को गंभीर चोट भी लगी थी। मामले में दोनों पक्षों की तरफ से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। किशोर का भी नाम आरोपी बनाकर डाल दिया गया।

जज से बोला- पढ़ाई में हुआ बड़ा नुकसान

किशोर ने बताया कि उसके मां-बाप मजदूरी करते हैं। निर्धनता के कारण अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए वह गांव की मुख्य सड़क के किनारे अंडा बेचता है। उसके पास न ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल और लैपटॉप उपलब्ध नहीं है, जिससे लॉकडाउन के दौरान उसकी पढ़ाई का काफी नुकसान हुआ है। प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र किशोर की मेहनत, लगन व पढ़ाई के प्रति झुकाव को देख द्रवित हो गए। उन्होंने उसके खिलाफ लंबित मुकदमे को बंद करने का फैसला किया। साथ ही उसके अभिभावक को किशोर की उचित देखभाल के साथ ही भविष्य में अपने विवादों में संतान को शामिल न करने का निर्देश दिया। साथ ही जिला बाल संरक्षण इकाई को निर्देश दिया कि बच्चे के संबंध में देखभाल योजना तैयार कर प्रस्तुत करें, ताकि इनकी मौलिक आवश्यकता पूरी की जा सके।

जज देंगे अंग्रेजी व विज्ञान की कोचिंग की फीस

जज के सामने किशोर ने अंग्रेजी व विज्ञान की कोचिंग पढ़ने की इच्छा जाहिर की। प्रधान दंडाधिकारी ने इन दोनों ही विषयों के शिक्षकों के यहां किशोर को दाखिला लेने को कहा। साथ ही यह आश्वस्त किया कि वे दोनों विषयों की ट्यूशन फीस खुद अपनी जेब से देंगे। शिक्षकों को यह भी निर्देश दिया कि बच्चे की गोपनीयता बरकरार रखी जाए। ताकि कक्षा में कोई अन्य किशोर इसे दया का पात्र न समझे। धर्मेन्द्र कुमार ने इस मामले के निपटारे में सहयोग किया।

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