बरही/कटनी:– परीक्षा देने के उपरांत परिणाम का इंतजार परीक्षार्थी बेताबी से कर रहे है। कल 14 मई को माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल से 10वी, 12वी का रिजल्ट घोषित होगा। स्पर्धा के इस जमाने मे अव्वल दर्जा पाने के लिए अभिभावक, शिक्षक अक्सर बच्चो पर दबाब बनाते है। परिणाम अव्वल न आने व पड़े दबाब से हताश व मायूस होकर कुछ विद्यार्थी आत्मघाती कदम उठा लेते है। यह तो महज परीक्षा का परिणाम है, जीवन मे अपार चुनोतिया है, जिसका सामना पूरे हौसले व जज्बे के साथ करने के लिए अभिभावकों व शिक्षकों को बच्चो पर दबाब डालने की जगह उन्हें मोटिवेट, एनकरेज करने की आवश्यकता है। समाज का चौथा स्तम्भ होने के नाते हमारा नैतिक दायित्व है कि सफलता व असफलता के बाद बच्चे आत्मघाती कदम न उठाने पाए, इसके लिए हम सभी को जागरूक होने की जरूरत है। इसी मोटिवेशनल थीम को लेकर यशभारत का यह एक प्रयास है।
खुद को साबित करने मौके अपार
कामयाब होना है तो थ्री इडियट्स के चतुर राम लिंगम की तरह नहीं, रैंचो की तरह मेहनत करनी होगी। क्योंकि मेहनत के लिए कोई शॉर्टकट और एकसूत्र नहीं होता। जिंदगी में खुद को साबित करने के लिए मौके अपार होते हैं, एक बार पिछड़ गए तो इसका मतलब यह नहीं कि आप जिंदगी की दौड़ में पीछे हो गए। असल इंसान तो वह है, जो लगातार मुश्किलों से जूझता हुआ आगे बढ़कर मुकाम हासिल करे। मुश्किलों को जीतने वाला ही विजेता कहलाता है।
दबाव नही, मार्गदर्शन करें
जिन छात्रों ने बोर्ड परीक्षा में बेहतर किया है, उन्हें ढेर सारी बधाई और हां, जो उतना बेहतर नहीं कर पाए, वे दिल छोटा न करें और मेहनत करते रहें। जिस क्षेत्र में रुचि हो, जहां बेहतर कर सकते हो, उसे अपनाओ। पर जिस भी काम को करो, पूरी तन्मयता के साथ करो। हमे एक बात जरूर महसूस हुई कि छात्र और उनके अभिभावक परीक्षा का दवाब कुछ ज्यादा ही लेते हैं, जो सही नहीं है।
शैक्षणिक सफलता जीवन की कुंजी नही- रावेंद्र द्विवेदी टीआई
इस बारे में बच्चो को जागरूक करने बरही थाना प्रभारी रावेंद्र द्विवेदी का कहना है कि शैक्षणिक व अकादमिक परिणाम जीवन की सफलता की कुंजी नही है, कई ऐसे विद्यार्थी है, जिनके शैक्षणिक परिणाम हमेशा अव्वल रहे है, लेकिन कंपीटिशन में वे पीछे रह गए, इस लिए परीक्षा परिणाम को लेकर बच्चे कम अंक आने के बाद और मेहनत करे, जो कमी रह गई उसे पूरा करने का आगे प्रयास करे, तो जीवन मे सफलता ही सफलता मिलेगी।
लक्ष्य तो हासिल होगा-विजय निगम
सरस्वती स्कूल बरही के व्याख्याता विजय निगम का कहना है कि आज नही तो कल लक्ष्य तो हासिल होगा, कोशिश में कही चूक हुई है, जिसे आगे सबब लेकर बढ़ना है, असफलता को लेकर मायूस नही होना है, बच्चे व अभिभावक जागरूक बने कामयाबी हासिल होगी।
जब बच्चे अभिभावकों की उम्मीद पर खरा नही उत्तर पाते तो वे मायूस हो जाते है,
क्षमता का आंकलन करे- राजेश पांडेय, प्राचार्य गरुकुल
अभिभावक बच्चो पर दवाव न बनाए, बल्कि यह देखने का प्रयास करे कमी कहां रह गई, जिसे पूरा करने के लिए बच्चो को उत्साहित करे, प्रायः देखा जाता है कि बच्चो की क्षमता का आंकलन किए बगैर उनपर अव्वल आने का जोर दिया जाता है, जो उचित नही है
जीवन मे बहुत इम्तिहान-रमाकांत मिश्रा, संचालक एसएसवीएम करौदी

