Site icon Yashbharat.com

परिश्रम से पथरीली जमीन पर बिछा दी हरियाली की चादर

नालछा (धार)। पहाड़ पर भी बगीचा तैयार किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए मन में आत्मविश्वास व कठिन परिश्रम की आवश्यकता होती है।

ऐसा ही एक उदाहरण नालछा विकासखंड के ग्राम कोठी सोडपुर में देखने को मिला। गंगाराम पिता हीरालाल को फलदार पौधे लगाने का जुनून इस तरह चढ़ा कि आज पथरीली व पहाड़ी जमीन पर हरा-भरा पर्यावरण का मंदिर बना दिया। खेत के चारों तरफ फैले फल-फूल और बगीचे वहां से गुजरने वाले को अनायास ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

कोठी सोडपुर के आदिवासी गंगाराम को करीब 15 वर्ष पूर्व खेत में सभी प्रकार के पौधे लगाने का जुनून सवार हुआ। उन्होंने एक-एक कर हर प्रकार के पौधे लगाए, जो अब बड़े हो गए हैं। इससे यहां एक आदर्श बागवानी तैयार हो गई है।

इसमें छायादार व फलदार पेड़ के साथ फूल व उद्यानिकी फसल भी देखने को मिलती है। यहां सेवफल, नारंगी, पपीता, केले, जाम, आम, नींबू, जामुन, अनार, करंज सहित कई प्रकार के पेड़ व पौधे देखने को मिलते हैं। गंगाराम ने सब्जियों की क्यारियां भी तैयार की हैं।

तैयार किए और भी पेड़

बागवानी की विशेषता यह है कि सेवफल में जो फल लगे थे, उसी के बीज से और भी पेड तैयार किए हैं। इसमें उन्हाेंने शासन की ओर से किसी भी प्रकार की सहायता नहीं ली है। इस बागवानी में जो भी आता है, उन्हें वे फल व सब्जियां खिलाते हैं।

ऐसे मिली प्रेरणा

गंगाराम से जब इस बागवानी को तैयार करने के पीछे का मकसद पूछा, तो उन्हाेंने बताया कि उनका परिवार बड़ा है। जब भी कभी बाजार जाते थे, तो वे घर के लिए फल लाते थे, लेकिन सभी सदस्यों को नहीं खिला पाते थे। अन्य किसी के खेत से उन्हें फल तोड़ने नहीं दिया जाता था। इस पर सोचा कि क्यों न मैं अपना ही फलों का बगीचा तैयार करूं। आर्थिक रूप से काफी कमजोर होने के बावजूद एक नलकूप खुदवाकर इस बागवानी में वर्षभर पानी देते हैं।

Exit mobile version