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पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में परमात्मा का रूप धारण करती है पाषाण की प्रतिमाएं : समता सागर महाराज

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कटनी। चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री 108 शांति सागर जी महाराज के 1928 के चार्तुमास से प्रतिफलित पुण्य भूमि कटनी नगर में संत शिरोमणी आचार्य भगवंत श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती परम शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समतासागर जी, मुनि श्री 108 महासागर जी, मुनि श्री 108 निष्कंपसागर जी, ऐलक श्री 105 निश्चयसागर जी महाराज के परम सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य वाणी भूषण बाल ब्रम्हचारी विनय भैया के कुशल निर्देशन में दान वीर सेठ चौधरी हुकमचंद जी जैन बंगला मंदिर के नवनिर्मित जिनालय की नवीन वेदियों में नौ जिनबिम्ब एवं अन्य जिनबिम्बों की पंच कल्याणक प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन 26 नवम्बर से 2 दिसम्बर तक होने जा रहा है।

आयोजन की विस्तृत जानकारी प्रदान करने के लिए शुक्रवार को नई बस्ती स्थित कार्यक्रम स्थल पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। पत्रवार्ता को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री 108 सन्त सागर जी महाराज ने बताया कि पंच कल्याणक प्रतिष्ठा की शुरुआत 26 नवम्बर को विशाल पद यात्रा से होगी। पद यात्रा पूरे शहर में भ्रमण करेगी। दूसरे दिन 27 नवम्बर को ध्वजारोहण एवं गर्भकल्याणक पूर्वरूप, गर्भकल्याणक उत्तररूप 28 नवम्बर, जन्म कल्याणक 29 नवम्बर, तप कल्याणक 30 नवम्बर, ज्ञानकल्याणक, कलशारोहण एवं वेदी प्रतिष्ठा 1 दिसम्बर एवं कार्यक्रम के आखिरी दिन मोक्ष कल्याणक नगर रथयात्रा 2 दिसम्बर को आयोजित की जाएगी।

मुनि श्री समता सागर महाराज ने कहा कि पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान पाषाण की प्रतिमाएं परमात्मा का रूप धारण करती हैं। यह आयोजन केवल जैन समाज का ही नहीं बल्कि पूरे शहर का है। इसकी तैयारियां वृहद रूप से की जा रही है। मुनि श्री 108 निष्कम्प सागर जी महाराज ने बताया कि स्वर्गीय हुकुमचंद जैन जी द्वारा करीब 50-55 साल पहले जैन चेत्यालय का निर्माण करवाया गया था। समाज के लोगों की संख्या बढ़ने के बाद अब इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसी तारतम्य में पंच कल्याणक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन स्थल पर भव्य पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। सात दिनों तक नई बस्ती के साथ ही पूरे शहर धर्म की अविरल धारा बहेगी। पत्रकार वार्ता का संचालन राकेश जैन कक्का ने किया। उन्होंने सभी से कार्यक्रमों में उपस्थित होकर महोत्सव कार्यक्रम का सानंद लाभ लेकर पुण्यार्जन करने का आग्रह किया है।

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