नई दिल्ली। फांसी की सजा ज्यादा से ज्यादा टालने के लिए निर्भया के दोषी हर रास्ता अपना रहे हैं। अब चार में से तीन दोषियों ने मंगलवार को उनके पास बाकी बचे दोनों विकल्प क्यूरेटिव और दया याचिका का सहारा लेने की इच्छा जाहिर की है। शीर्ष कोर्ट के निर्देश पर तिहाड़ जेल प्रशासन ने इनको नोटिस जारी कर इस सिलसिले में जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया था जो 25 दिसंबर को समाप्त हो रहा है।
फांसी की सजा पाने वाले दोषी के लिए क्यूरेटिव याचिका अंतिम कानूनी विकल्प होता है। जिसके बाद दया याचिका देकर राष्ट्रपति से फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की गुहार लगाई जाती है। राष्ट्रपति से इसके खारिज होने के बाद डेथ वारंट जारी किया जाता है।
गौरतलब है कि चारों दोषी अक्षय, मुकेश, पवन और विनय की पुनर्विचार याचिका शीर्ष कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। 16 दिसंबर 2012 की रात 23 वर्षीय निर्भया से दुष्कर्म के बाद हत्या के आरोप में कोर्ट ने छह लोगों को दोषी ठहराया था।
इसमें मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी और एक अभियुक्त नाबालिग था जिसे संप्रेक्षण गृह भेजा गया था जहां से उसे तीन साल बाद रिहा कर दिया गया।

